पुणे। महाराष्ट्र सरकार ने पुणे स्थित वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट (VSI) को दी गई अनुसंधान धनराशि की जांच के लिए एक समिति गठित करने का आदेश जारी किया है। यह संस्थान शुगर इंडस्ट्री में रिसर्च के लिए जाना जाता है और इसकी अगुवाई राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) प्रमुख शरद पवार करते हैं। वहीं उपमुख्यमंत्री अजित पवार भी इस संस्थान की संचालन समिति में शामिल हैं।
सरकारी निर्देश के अनुसार, राज्य की चीनी मिलों से प्रति टन चीनी पर वसूले गए एक-एक रुपये का उपयोग कैसे किया गया, इसकी ऑडिट होगी। चीनी आयुक्त संजय कोल्टे ने कहा कि कैबिनेट की 30 सितंबर वाली बैठक में यह फैसला लिया गया था और अब इसकी प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धनराशि के दुरुपयोग को लेकर अभी तक कोई शिकायत सामने नहीं आई है।
लेकिन इस फैसले ने राजनीतिक गर्मी बढ़ा दी है। NCP (एसपी) विधायक रोहित पवार ने सीधे-सीधे कहा है कि यह साधारण जांच नहीं बल्कि सत्ता पक्ष की राजनीतिक मंशा का हिस्सा है। उनका आरोप है कि भाजपा ने ठाणे के बाद अब बारामती को निशाने पर ले लिया है। रोहित पवार ने यह भी कहा कि वीएसआई ने किसानों और चीनी उद्योग के हित में वर्षों से अहम योगदान दिया है, ऐसे संस्थान को बदनाम करने की साजिश की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया, “जब विपक्ष भ्रष्टाचार के सबूत पेश करता है तो सरकार चुप रहती है, लेकिन राजनीतिक लाभ के लिए अच्छे संस्थानों की जांच कराई जा रही है।” रोहित पवार ने इसे गृहमंत्री अमित शाह के हालिया बयान से जोड़ते हुए भाजपा की रणनीति बताई कि पार्टी “बैसाखियों” पर निर्भर नहीं रहना चाहती और इसके पीछे राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिश है।
इस कदम को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बारामती, महाराष्ट्र की सियासत का बड़ा केंद्र बनने वाला है — जहाँ पवार बनाम भाजपा की टक्कर और दिलचस्प मोड़ ले सकती है।











