नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मुकदमों की फेहरिस्त लगातार बढ़ती जा रही है। गत वर्ष के अंत तक कुल लंबित मामलों का आंकड़ा 92,251 पहुंच गया। माना जा रहा है कि साल 2026 में यह लाख तक पहुंच जाएगा। गत वर्ष सितंबर माह तक यह आंकड़ा 88,417 था, जिसमें 69,553 दीवानी और 18,864 आपराधिक मामले हैं।
राष्ट्रीय डेटा ग्रिड के अनुसार 31 दिसंबर को 92 हजार से पार पहुंचा मौजूदा आंकड़ा अब तक का सर्वाधिक है और मामलों की बढ़ती संख्या को दर्शाता है। साल 2014 में यह संख्या 63,000 और 2023 के अंत तक लगभग 80,000 थी, जो लगातार वृद्धि दिखाती है। चुनौती यह है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने के बावजूद लंबित मामलों का अंबार कम नहीं हो रहा है। नए मामलों के आने की दर निपटारे की दर से अधिक है, जिससे लंबित मामलों की तादाद बढ़ती जा रही है।








