ठाणे–बोरिवली भुयारी मार्ग पर मिट्टी ढुलाई का विवाद
डंपर vs कन्वेयर बेल्ट: कौन सा विकल्प बेहतर?
350 डंपर रोज़ दौड़ेंगे, हवा और ध्वनि प्रदूषण की चिंता
मुल्लाबाग में वायु गुणवत्ता सूचकांक 234 तक पहुंचा
मुंबई:ठाणे–बोरिवली भुयारी मार्ग परियोजना राज्य शासन की महत्त्वाकांक्षी योजना है, जो हाल ही में फिर से विवादों में घिर गई है। इस परियोजना में खोदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी की सही तरीके से ढुलाई को लेकर स्थानीय निवासी और प्रशासन आमने-सामने हैं।
मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने मिट्टी की ढुलाई के लिए तीन विकल्प सुझाए हैं। पहला विकल्प है कि भुयारी मार्ग पूरी तरह से तैयार करके उसी मार्ग से डंपरों द्वारा मिट्टी ढुलाई की जाए। दूसरा विकल्प है कन्वेयर बेल्ट प्रणाली, जिसमें यंत्रणा के माध्यम से मिट्टी एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाई जाएगी। तीसरा विकल्प है स्वतंत्र मार्गिका तैयार कर डंपरों द्वारा मिट्टी ले जाई जाए।
परियोजना प्रभावित निवासियों की समिति का दावा है कि 90 प्रतिशत लोगों ने डंपरों द्वारा मिट्टी ढुलाई को मंजूरी दी है। शेष 10 प्रतिशत लोगों से समझौता कर अंतिम फैसला लिया जाएगा। समिति सदस्य राकेश मोदी के अनुसार, कन्वेयर बेल्ट प्रणाली के लिए बड़ी मशीनरी और संरचना की आवश्यकता होगी, जिससे हवा और ध्वनि प्रदूषण बढ़ सकता है। वहीं, स्वतंत्र मार्गिका से डंपरों द्वारा मिट्टी ले जाने पर मुख्य सड़क की ट्रैफिक प्रभावित नहीं होगी।
हालांकि, प्रतिदिन लगभग 350 डंपर परिसर से गुजरेंगे, जिससे हवा और ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की संभावना है। इसी चिंता के चलते कुछ निवासियों ने इस विकल्प के खिलाफ अपनी आपत्ति जताई है। उल्लेखनीय है कि मुल्लाबाग क्षेत्र में 18 फरवरी को वायु गुणवत्ता सूचकांक 143 दर्ज किया गया था, जबकि 20 फरवरी को यह बढ़कर 234 हो गया।
परियोजना को लेकर जल्द ही सभी पक्षों की बैठक होने की संभावना है, जिसमें अंतिम निर्णय लिया जाएगा।












