शक्तिपीठ महामार्ग के खिलाफ किसानों का बड़ा विरोध
सांगली में किसानों का प्रशासन को खुला इशारा
सांगली जिलेके वाळवा तहसील में प्रस्तावित शक्तिपीठ महामार्ग को लेकर किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। किसानों ने प्रशासन को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि “खून बहा देंगे, जान दे देंगे, लेकिन अपनी जमीन नहीं देंगे।” इस मुद्दे को लेकर वाळवा तालुका शक्तिपीठ विरोधी संघर्ष समिति ने सांगली के जिलाधिकारी मैनाक घोष को 990 किसानों के हस्ताक्षरयुक्त आपत्ति पत्र सौंपे हैं।
किसानों का कहना है कि यह महामार्ग उनकी उपजाऊ और सिंचित कृषि भूमि से होकर गुजरने वाला है, जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। पिछले एक महीने से वाळवा तहसील के कई गांवों में आंदोलन और जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। कामेरी, येलूर, इटकरे, ऐतवडे खुर्द और अन्य गांवों में लगातार सभाएं, मोर्चे और बैठकों का आयोजन किया जा रहा है।
हाल ही में हजारों महिलाओं ने भी सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि विकास के नाम पर उनकी खेती और भविष्य को खतरे में डाला जा रहा है। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया है कि जब तक शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना रद्द नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब इस आंदोलन ने राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर रूप ले लिया है। पूरे जिले की नजर सरकार और प्रशासन की अगली भूमिका पर टिकी हुई है।












