नागपुर, संवाददाता-आगामी नगरपरिषद चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी में आंतरिक गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। नागपुर जिला ग्रामीण कांग्रेस को दो बड़े राजनीतिक झटकों का सामना करना पड़ा है। दो महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों कामठी और मौदा में वरिष्ठ नेताओं के बागी होकर पार्टी छोड़ने से कांग्रेस की चुनावी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
कामठी में बड़ा राजनीतिक भूचाल
कामठी शहर में कई वर्षों से कांग्रेस को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ नेता और पूर्व नगराध्यक्ष मोहम्मद शहाफत अंसारी ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस (अजित पवार गुट) में प्रवेश किया है। 2017 की नगरपरिषद चुनाव में अंसारी ने कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत दिलाते हुए स्वयं नगराध्यक्ष पद हासिल किया व १६ नगरसेवकों को निर्वाचित करा एकदलीय सत्ता स्थापित की थी। हाल ही में हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार को मिले १७ हजार मताधिक्य में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आंतरिक गुटबाजी बनी बगावत का कारण
पार्टी में महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के उपाध्यक्ष सुरेश भोयर के नेतृत्व में कथित गुटबाजी, नए कार्यकर्ताओं को प्राधान्य तथा पुराने कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के आरोपों ने असंतोष बढ़ा है।
ऐसी चर्चा थी कि कामठी के मेयर पद के लिए अंसारी की उम्मीदवारी निश्चित थी, लेकिन आंतरिक पार्टी बैठक से उन्हें और उनके समर्थकों को बाहर रखे जाने के बाद असंतोष अपने चरम पर पहुंच गया। रामटेक के सांसद श्यामकुमार बर्वे की उपस्थिति में हुई बैठक में यह विवाद शाब्दिक तकरार तक पहुंच गया। लगातार हो रहे अपमान के विरोध में अंसारी, पूर्व नगराध्यक्ष प्रमोद मानवटकर, पूर्व नगरसेवक रघुवीर मेश्राम, मोहम्मद अरशद सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रवादी (अजित पवार गट) में प्रवेश करते हुए आगामी चुनाव में नगराध्यक्ष व 34 नगरसेवक पदों पर उम्मीदवारी दाखिल करने की घोषणा की।












