तेहरान। ईरान और अमेरिका के मध्य तनाव कम करने के उद्देश्य से पाकिस्तान की मध्यस्थता में युद्धविराम को लेकर वार्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है। इस मसले के तनाव को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान ने स्वयं को एक मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया है। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में अभी तक कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है। इसी बीच ईरान के एक नेता ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने कहा कि पाकिस्तान दोस्त जरूर है, लेकिन वह बातचीत में बीच का सही पक्ष (मध्यस्थ) नहीं बन सकता। रेजई ने कहा कि पाकिस्तान अक्सर डोनाल्ड ट्रम्प और अमेरिका के हितों को ध्यान में रखता है और उनके खिलाफ कुछ नहीं कहता। इसलिए वह निष्पक्ष नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि एक सही मध्यस्थ वही होता है, जो दोनों पक्षों के बीच निष्पक्ष रहे, न कि हमेशा एक ही पक्ष की तरफ झुका रहे। (पेज 6 पर)
ईरान के पास ज्यादा समय नहीं : ट्रम्प
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को ईरान को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि उसके पास युद्ध खत्म करने के लिए सीजफायर पर सहमत होने के लिए सिर्फ तीन दिन हैं, नहीं तो उसकी तेल पाइपलाइन में ब्लास्ट हो जाएगा। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान तेल का निर्यात नहीं कर पाता, तो पाइपलाइन में दबाव बढ़ेगा। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि तेल को जहाजों या स्टोरेज टैंकों में भेजने का रास्ता बंद है और उस पर नाकेबंदी लगी हुई है। उन्होंने दावा किया कि जब तेल का बहाव अचानक रोकना पड़ता है, तो पाइपलाइन के अंदर दबाव बनता है और तकनीकी व प्राकृतिक कारणों से वह फट सकती है। ट्रम्प के मुताबिक, अगर ऐसा हुआ तो पाइपलाइन को पहले जैसी हालत में दोबारा बनाना लगभग नामुमकिन होगा और उसकी क्षमता भी काफी घट जाएगी।









