मुंबई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने सोमवार को दक्षिण-पश्चिम मानसून 2026 का पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है, जिसने देश के साथ-साथ महाराष्ट्र के किसानों की भी चिंता बढ़ा दी है। आईएमडी (IMD) के अनुसार, इस वर्ष देश में औसत वर्षा का केवल 92 प्रतिशत होने का अनुमान है, जिसे मौसम विज्ञान की भाषा में ‘सामान्य से कम’ वर्षा की श्रेणी में रखा जाता है।
यह लंबी अवधि यानी 1971 से 2020 तक के औसत 87 सेंटीमीटर के अनुमान पर आधारित है। इसका मतलब है कि बारिश सामान्य से थोड़ी कम हो सकती है। मौसम विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्र ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में भी मानसून की स्थिति बहुत उत्साहजनक नहीं रहने वाली है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में बारिश का स्तर सामान्य से नीचे रह सकता है।
अल नीनो का प्रभाव
मौसम विभाग ने पूर्वानुमानों में कहा है कि इस साल अल नीनो का प्रभाव रह सकता है, जिसकी वजह से न केवल प्रचंड गर्मी पड़ेगी बल्कि बारिश भी कम होगी। विभाग ने कहा है कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) की तटस्थ स्थितियां रहने की सबसे अधिक संभावना है। इसके बाद, दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान अल नीनो की मजबूत स्थिति बनने की बहुत अधिक संभावना है। इस वजह से मानसून कमजोर रह सकता है और सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
किन इलाकों में होगी ज्यादा बारिश?
आईएमडी ने देश भर के लिए जारी लंबी अवधि के पूर्वानुमानों में कहा है कि भौगोलिक रूप से, देश के कई हिस्सों में मौसमी वर्षा सामान्य से कम रहने की अधिक संभावना है। हालांकि, आईएमडी ने पूर्वोत्तर, उत्तर-पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना जताई है।










