लोकवाहिनी, संवाददाता:नई दिल्ली। मोदी सरकार प्रशासनिक ढांचे को नई पहचान दे रही है। इसका मकसद सत्ता से ज्यादा सेवा और अधिकार से ज्यादा जिम्मेदारी तय करना है। इसी कड़ी में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में बन रहे नए पीएम कार्यालय का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। राजभवनों को नया नाम दिया जा रहा है। राजभवन अब लोक भवन के नाम से जाने जाएंगे। इस तरह देश के पब्लिक इंस्टीट्यूशन्स में गहरा बदलाव हो रहा है। गवर्नन्स का आइडिया सत्ता से सेवा और अथॉरिटी से जिम्मेदारी की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव नहीं बल्कि कल्चरल और मोरल है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गवर्नन्स की जड़ों को कर्तव्य और ट्रांसपैरेंसी दिखाने के लिए नया रूप दिया गया है। हर नाम, हर बिल्डिंग और हर सिंबल अब एक सिंपल आइडिया को और इशारा करता है। सरकार सेवा के लिए होती है। राजपथ पहले ही कर्तव्य पथ बन गया। एक लैंडमार्क सड़क अब एक मैसेज देती है। ये परिवर्तन बताता है कि पावर कोई हक नहीं है बल्कि यह एक ड्यूटी है। प्रधानमंत्री के ऑफिशियल घर का नाम 2016 में लोक कल्याण मार्ग रखा गया।एक ऐसा नाम जो वेलफेयर इंडिया, एक्सक्लूसिविटी नहीं। हर चुनी हुई सरकार के आगे आने वाले काम की याद दिलाता है।
पीएमओ वाले नए कॉम्प्लेक्स को सेवा तीर्थ कहा जाता है। एक वर्कप्लेस जिसे सेवा की भावना दिखाने के लिए डिज़ाइन किया गया है और जहां नेशनल प्रायॉरिटीज़ बनती हैं। सेंट्रल सेक्रिटेरिएट का नाम कर्तव्य भवन है .यह एक बड़ा एडमिनिस्ट्रेटिव हब है जो इस सोच के आस-पास बना है कि पब्लिक सर्विस एक कमिटमेंट है। ये बदलाव एक गहरे आइडियोलॉजिकल बदलाव को दिखाते हैं। भारत का लोकतंत्र पावर के बजाय ज़िम्मेदारी और स्टेटस के बजाय सेवा को चुन रहा है। नामों में बदलाव सोच में भी बदलाव है।












