नाशिक:नासिक में केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने एक पत्रकार वार्ता में महिला आरक्षण, राजनीतिक स्थिति तथा विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक प्रस्तुत किया गया था, जिसे वर्ष 2023 में लाया गया और उसे समर्थन भी प्राप्त हुआ था। उनके अनुसार, महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए यह विधेयक अत्यंत आवश्यक था। उन्होंने यह भी बताया कि परिसीमन की प्रक्रिया आवश्यक होती है, जो लगभग तीस वर्षों के बाद की जाती है।
आठवले ने कहा कि प्रस्ताव के अनुसार महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण बढ़ाने की योजना थी, जिससे लोकसभा एवं विधानसभाओं में सीटों की संख्या भी बढ़ सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विपक्षी दलों ने विशेष रूप से दक्षिण भारत के मतदाताओं को गुमराह किया, जिससे यह विधेयक आगे नहीं बढ़ पाया। उन्होंने इसे राजनीतिक योजना का विफल प्रयास बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक समर्थन मिल जाता, तो यह विधेयक पारित हो सकता था। रिपब्लिकन पार्टी द्वारा आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी का उद्देश्य दलित, मराठा और ओबीसी समाज को एक साथ लाना है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में पार्टी को अधिक राज्यों में मान्यता प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने विदेश नीति और अन्य राजनीतिक विषयों पर भी अपनी राय रखी।








