बेंगलुरु। कर्नाटक में आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के पथ संचलन में भाग लेने पर निलंबित पंचायत विकास अधिकारी (पीडीओ) को बड़ी राहत मिली है। कर्नाटक राज्य प्रशासनिक न्यायाधिकरण (केएसएटी) ने उनके निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है।
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने गुरुवार को बताया कि उनके विधि कार्यालय ने रायचूर जिले के लिंगासुगुर में पदस्थ पीडीओ प्रवीण कुमार के निलंबन को चुनौती दी थी। सूर्या ने कहा कि यह निलंबन “राजनीतिक दबाव में लिया गया मनमाना फैसला” था, जिसे न्यायाधिकरण ने स्थगित कर दिया है।
सूर्या ने अपने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर लिखा,
“मेरे विधि कार्यालय ने रायचूर के लिंगासुगुर में आरएसएस के पथ संचलन में भाग लेने पर निलंबित किए गए पीडीओ प्रवीण कुमार के.पी. के मनमाने निलंबन को केएसएटी के समक्ष चुनौती दी थी। आज न्यायाधिकरण ने उस पर रोक लगा दी है।”
सांसद ने इस फैसले को कांग्रेस सरकार के लिए “सबक” बताया और कहा कि “किसी भी तरह की राजनीतिक धमकी या दबाव आरएसएस के राष्ट्रनिर्माण के आदर्शों को नहीं रोक सकता।”
उन्होंने कर्नाटक के पूर्व महाधिवक्ता प्रभुलिंग नवदगी को कानूनी सहायता और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। सूर्या ने यह भी कहा कि न्यायालय का यह निर्णय संविधानिक स्वतंत्रता और विचार अभिव्यक्ति के अधिकार की जीत है।
पीडीओ प्रवीण कुमार को 18 अक्टूबर को निलंबित कर दिया गया था, जब वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे थे। निलंबन के बाद तेजस्वी सूर्या ने उनसे मुलाकात कर कानूनी सहायता और हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया था।
इस आदेश से अब निलंबन अस्थायी रूप से निरस्त हो गया है और पीडीओ को राहत मिली है। भाजपा इसे “राजनीतिक प्रतिशोध के खिलाफ न्याय की जीत” के रूप में देख रही है, जबकि कांग्रेस सरकार पर प्रशासनिक पक्षपात का आरोप फिर से तेज हो गया है।











