लोकवाहिनी संवाददाता चंद्रपुर। बुद्ध पूर्णिमा की चांदनी रात में ताडोबा अंधारी व्याघ्र परियोजना में शुक्रवार (1 मई) को वन्यजीव गणना का अनोखा अभियान आयोजित किया जाएगा। इस विशेष उपक्रम में बफर और कोर जोन मिलाकर कुल 168 मचान बनाए गए हैं, जहां से 12 घंटे तक लगातार वन्यजीवों का निरीक्षण किया जाएगा। इस अभियान में 210 पर्यटकों के साथ 200 से अधिक वन अधिकारी और कर्मचारी भाग लेंगे।
बुद्ध पूर्णिमा की रात चांदनी के तेज प्रकाश के कारण जंगल में स्पष्ट दृश्यता रहती है, जिससे वन्यजीवों की गतिविधियों का आसानी से निरीक्षण किया जा सकता है। गर्मी के कारण पानी की कमी होने से जानवर जलस्रोतों के आसपास अधिक संख्या में दिखाई देते हैं, इसी कारण इस दिन वन्यजीव गणना की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।
वन विभाग के अनुसार, बफर जोन में 69 मचान तैयार किए गए हैं, जहां 210 पर्यटकों ने ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। प्रत्येक मचान पर दो पर्यटक और एक गाइड की व्यवस्था की गई है। यह गणना मोहुर्ली, मूल, चंद्रपुर, शिवनी, पळसगांव और खडसंगी वन परिक्षेत्रों में की जाएगी। सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की पूरी व्यवस्था वन विभाग द्वारा की गई है।
कोर जोन अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण यहां पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध है। इस क्षेत्र में केवल वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ही गणना करेंगे। कोर जोन के मोहुर्ली, ताडोबा, कोलसा, कोलारा और कारवा वन परिक्षेत्रों में 99 मचान बनाए गए हैं, जहां 200 से अधिक कर्मचारी तैनात रहेंगे। यह गणना शुक्रवार शाम 6 बजे से शुरू होकर शनिवार सुबह 6 बजे तक लगातार चलेगी। इस दौरान सभी प्रतिभागियों को वन विभाग द्वारा सुरक्षित रूप से उनके मचान तक पहुंचाया जाएगा।









