नागपुर, संवाददाता:नगर पालिका और नगर पंचायत चुनावों को लेकर जिले में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। सभी प्रमुख दलों में बैठकों और साक्षात्कारों का दौर शुरू हो चुका है। आघाड़ी (महाविकास आघाड़ी) और युति (महायुति) के लिए भी बातचीत जारी है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस दोनों ही दलों में टिकट के दावेदारों की भीड़ लग गई है। पार्टियों के बड़े नेताओं के नजदीकी कार्यकर्ताओं को ही टिकट मिलने की संभावना जताई जा रही है। इस वजह से दूसरे और तीसरे स्तर के कार्यकर्ताओं ने अब नई आघाड़ियां (स्थानीय गठबंधन) बनाना शुरू कर दिया है।
5 नगर पालिकाएं और 12 नगर पंचायतों में चुनाव
नागपुर जिले में इस बार 15 नगर पालिकाओँ और 12 नगर पंचायतों में चुनाव होने जा रहे हैं। नवगठित नगर पंचायतों में खरबी-बहादुरा, येरखेड़ा, कोंढाली, डिगडोह, बिडगांव-तरोडी-पांढुर्णा, बेसा-पिंपळाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन जगहों पर पहली बार चुनाव हो रहे हैं, इसलिए स्थानीय नेताओं में काफी उत्साह देखा जा रहा है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ने चुनाव अकेले लड़ने का संकेत दिया है। भाजपा ने शिवसेना (शिंदे गुट) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) से प्रारंभिक बातचीत की थी, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। इसलिए अब शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
इसी तरह, कांग्रेस ने अपने इच्छुक उम्मीदवारों के साक्षात्कार पूरे कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को भेज दी है। मगर शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से कोई औपचारिक बातचीत नहीं की गई है। उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना भी इस बार अकेली पड़ती दिख रही है, इसलिए वह शरद पवार गुट की एनसीपी, आम आदमी पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के कुछ गुटों के साथ गठबंधन की दिशा में बातचीत कर रही है। यह आघाड़ी लगभग तय मानी जा रही है।
मतविभाजन से भाजपा-कांग्रेस की बढ़ सकती है मुश्किल
स्थानीय स्तर पर दूसरे और तीसरे पंक्ति के कार्यकर्ता बड़े दलों से उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने स्वतंत्र गठबंधन बनाकर मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इन नई आघाड़ियों के चलते मतों का विभाजन होगा, जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
इन गठबंधनों का भविष्य चुनाव परिणामों पर निर्भर करेगा, लेकिन इससे नगर निकाय चुनाव में मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।











