हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का हक, कोई यह न बताए हमें क्या करना है: जयशंकर
लोकवाहिनी, संवाददाता चेन्नई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं, दुर्भाग्य से हमारे हैं। अगर कोई देश यह तय करता है कि वह जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद जारी रखेगा तो हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार है। विदेश मंत्री ने यह बात आईआईटी मद्रास के एक कार्यक्रम में शुक्रवार को कही। उन्होंने कहा कि हम उस अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह हम पर निर्भर है। कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। हमें खुद को बचाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, वह करेंगे।
साथ ही जयशंकर ने कहा कि अच्छे पड़ोसियों के मामले में भारत निवेश करने, मदद देने और तकनीक साझा करने में कभी पीछे नहीं हटता, फिर चाहे वह कोविड-19 महामारी के दौरान टीके हों, यूक्रेन संघर्ष के दौरान ईंधन एवं खाद्य सहायता हो या श्रीलंका को उसके वित्तीय संकट के दौरान दी गई चार अरब अमेरिकी डॉलर की वित्तीय मदद हो।
विदेश मंत्री ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर कहा कि बात जब बुरे पड़ोसियों की आती है, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। भारत की प्रगति इस क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक लहर है और हमारे अधिकांश पड़ोसी मानते हैं कि भारत की प्रगति से उनका भी विकास होता है। लेकिन जब आतंकवाद फैलाने वाले बुरे पड़ोसियों की बात आती है, तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है और वह हर संभव कदम उठाएगा। आप हमारे देश में आतंकवाद फैलाना जारी रखते हुए हमसे पानी साझा करने का अनुरोध नहीं कर सकते।
विदेश मंत्री ने कहा कि ऐसी स्थिति से बचने के लिए अन्य देशों के साथ संवाद करना जरूरी है, जिसमें भारत के इरादों को गलत तरीके से समझा जाए। उन्होंने कहा, लोगों को आपको गलत समझने से रोकने का तरीका है संवाद करना। अगर आप अच्छी तरह, स्पष्ट रूप से और ईमानदारी से संवाद करते हैं, तो अन्य देश और अन्य लोग इसका सम्मान करते हैं और इसे स्वीकार करते हैं।
जयशंकर ने कहा, दुनिया भर में बहुत से लोग अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत पर गर्व करते हैं। मुझे कोई कारण नजर नहीं आता कि हमें ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि प्राचीन सभ्यताओं में से वास्तव में बहुत कम ऐसी हैं, जो प्रमुख आधुनिक राष्ट्र के रूप में उभर पाईं और भारत उनमें से एक है। जयशंकर ने कहा, हमें अपने अतीत की ऐसी समझ है, जो बहुत कम देशों के पास है। लोकतांत्रिक राजनीतिक मॉडल अपनाने के हमारे फैसले ने ही लोकतंत्र के विचार को एक सार्वभौमिक राजनीतिक अवधारणा बना दिया। उन्होंने कहा, अगर हमने वह रास्ता नहीं अपनाया होता, तो लोकतांत्रिक मॉडल, जैसा कि हम जानते हैं, तटीय और संकीर्ण होता। पश्चिम के साथ साझेदारी भी अहम है और इसी तरह हम दुनिया को आकार देते हैं। जयशंकर ने कहा कि वह भारत की ओर से बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए दो दिन पहले ही ढाका गए थे।







