लोकवाहिनी, नीतीश ओझा:नागपुर। ओलंपिक का प्रमुख हिस्सा तैराकी खेल को लेकर नागपुर के सांसद और विधायक अनदेखी करते नजर आते हैं। नागपुर शहर की जनसंख्या इस समय 40 लाख है, जबकि पूरे शहर में 20 स्विमिंग पूल भी नहीं हैं। शहर के रसूखदारों के रिहायशी एरिया में यह सुविधा शासन द्वारा व निजी क्लबों द्वारा उपलब्ध कराई गई है, जबकि गरीब के लाल तैराकी खेल में दांव आजमाना चाहते हैं। परंतु शहर के अधिकतम हिस्सों में स्विमिंग पूल की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे उनके अरमान पूरे होना तो दूर की बात है, यह सोचना भी बेमानी साबित हो सकता है।
हाल ही में सांसद नितिन गडकरी ने मनपा के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य पर 75 बाग (गार्डन) बनाने के निर्देश दिए, परंतु तैराकी जैसे ओलंपिक से जुड़े खेल को बढ़ावा देने के लिए कोई खास पहल नहीं करना समझ से परे है।
शहर में इस समय जलकलश स्विमिंग पूल, तिरपुड़े संस्थान, एनआईटी अंतरराष्ट्रीय जलतरण तलाव, डॉ. श्रीकांत जिचकार मेमोरियल स्विमिंग पूल, नेशनल तैराकी संस्थान, एनईईआरआई (NEERI) कर्मचारियों के लिए स्विमिंग पूल, मरहिलिन स्विमिंग पूल, जलतरण तलाव वायुसेना नगर, कामगार कल्याण केंद्र, आज्ञाराम देवी चौक स्थित स्विमिंग पूल, डॉ. बाबासाहब अंबेडकर खेल परिसर स्थित स्विमिंग पूल और सदर स्थित रेलवे क्लब स्थित स्विमिंग पूल मौजूद हैं।
इसके अलावा शहर के बड़े अपार्टमेंट व स्कूलों में भी निजी स्विमिंग पूल हैं, परंतु इनका इस्तेमाल बाहरी लोग नहीं कर सकते। कई स्कूल शहर के बाहर होने के कारण, अगर स्कूल संचालक इजाजत दे भी दें, तो वहां तक पहुंच पाना आम आदमी के बस की बात नहीं है। ऐसे में सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले उभरते तैराकों के लिए संसाधनों का अभाव उनकी प्रगति में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।










