नागपुर। राज्य में गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की कमी की पृष्ठभूमि में एक सुकून देने वाली खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के बांधों में फिलहाल 47.72 फीसदी जल भंडारण उपलब्ध है, जो पिछले साल से करीब छह फीसदी अधिक होने की जानकारी जल अभ्यासक डॉ. प्रवीण महाजन ने दी। बांधों में पानी का स्तर लगभग आधा नजर आ रहा है, लेकिन एक महत्वपूर्ण संदेश यह दिया जा रहा है कि पानी तो है, लेकिन इसका संयमित उपयोग करें क्योंकि अगले डेढ़ से दो महीने बिना बारिश के ही निकालने हैं।
राज्य में कुल 3028 बड़ी, मध्यम और छोटी परियोजनाएं हैं जिनकी कुल जल भंडारण क्षमता 48,582.6 दलघमी है। इसमें से मृत जल संग्रह 7,742 दलघमी है। वर्तमान में उपलब्ध जल भंडारण 27,309.91 दलघमी है, जो कुल क्षमता का 47.72 प्रतिशत है। पिछले साल की समान अवधि में यह संग्रह 41.33 फीसदी था। इससे पता चलता है कि इस वर्ष स्थिति अपेक्षाकृत संतोषजनक है।
राजस्व विभाग के अनुसार:
नागपुर मंडल: 387 परियोजनाएं
अमरावती मंडल: 276 परियोजनाएं
छत्रपति संभाजीनगर मंडल: 929 परियोजनाएं
नासिक मंडल: 539 परियोजनाएं
पुणे मंडल: 724 परियोजनाएं
कोंकण मंडल: 173 परियोजनाएं
इन सभी परियोजनाओं के सम्मिलित भंडारण से राज्य में जल की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। अप्रैल के मध्य तक पहुँचते-पहुँचते राज्य को अभी भी बारिश के लिए करीब डेढ़ से दो महीने का इंतजार करना पड़ेगा। इस अवधि में पीने का पानी, खेती और पशुओं के लिए पानी इसी उपलब्ध जल भंडारण से मुहैया कराना होगा।
उन्होंने कहा, जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, वाष्पीकरण की दर के साथ-साथ पानी की मांग बढ़ेगी और उपलब्ध जल भंडारण में लगभग 10 से 15 प्रतिशत की कमी होने की उम्मीद है। इसके चलते बांधों में पानी भले ही दिख रहा हो, लेकिन इसका उपयोग बेहद योजनाबद्ध और किफायती तरीके से करने की जरूरत है। शहरों में जल आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका है और कुछ जगहों पर कटौती या वैकल्पिक योजना बनानी पड़ सकती है।
उन्होंने संकेत दिया है कि ग्रामीण इलाकों में भी कमी न हो इसके लिए पहले से ही सावधानी बरती जाए। उनके मुताबिक, पानी की उपलब्धता एक सकारात्मक बात है, लेकिन अगर इसका इस्तेमाल अनियोजित हुआ तो भविष्य में दिक्कत पैदा हो सकती है। अतः नागरिकों से कहा गया कि पानी की बर्बादी रोकना, रिसाव रोकना, पुनर्चक्रण (Recycle) को प्राथमिकता देना तथा आवश्यक मात्रा में ही पानी का उपयोग करना आवश्यक है।
जल प्रबंधन हेतु विविध उपाय योजना लागू की जानी चाहिए। इसमें जल आपूर्ति योजना, टैंकर प्रबंधन, जल संसाधनों की सुरक्षा और जल संरक्षण के बारे में जन जागरूकता पर जोर दिया जाना चाहिए। यदि कुछ क्षेत्रों में जल के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए तो निश्चित रूप से अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा। हालांकि महाराष्ट्र में मौजूदा जल आपूर्ति राहत देने वाली है, लेकिन अगले दो महीने की अवधि बहुत महत्वपूर्ण होने वाली है।
वाष्पीकरण के कारण कमी और बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए संदेश— “पानी है, लेकिन इसे संयम से उपयोग करें” —प्रत्येक नागरिक को इसे गंभीरता से लेने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।











