दो दिवसीय ‘नागपुर जल संवाद 2026’ राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू
लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने उम्मीद जताई कि जल संरक्षण बहुस्तरीय सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी के माध्यम से एक जन आंदोलन बनना चाहिए और इससे किसानों को लाभ मिलना चाहिए। पूर्ति संश्लेषण समृद्धि कल्याणकारी संस्था की रजत जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय सम्मेलन ‘नागपुर जल संवाद 2026’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राज्य मंत्री डॉ. पंकज भोयर और एड. आशीष जायसवाल, पूर्व मंत्री सुधीर मुनगंटीवार, देहरादून-उत्तराखंड से पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित अनिल प्रकाश जोशी, चित्रकूट-उत्तर प्रदेश से पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित जल योद्धा उमाशंकर पांडे, सहारनपुर-उत्तर प्रदेश से पद्मश्री सेठपाल सिंह, असम से पूर्वोत्तर भारत जल वार्ता के समन्वयक केशव कृष्ण छत्रधारा, नई दिल्ली से जल शांति केंद्र के मुख्य कार्यकारी निदेशक संजय कश्यप, कोहिमा-नागालैंड से जल एवं पर्यावरण विशेषज्ञ स्वेदेबिनो नात्सो, जल विशेषज्ञ पिनाकदास गुप्ता मंचासीन थे।
नागपुर के डॉ. वसंतराव देशपांडे सभागार में आयोजित सम्मेलन में विदर्भ में किसान आत्महत्या मुक्त जल संरक्षण समाधान मुख्य चर्चा का विषय रहा। इस अवसर पर गडकरी ने कहा कि जल संरक्षण के माध्यम से जलस्तर बढ़ाना चाहिए, जिससे सिंचाई में वृद्धि हो और किसानों को अच्छी पैदावार मिल सके। जल अनेक समस्याओं का समाधान है और इससे विदर्भ में किसान आत्महत्या मुक्त हो सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसमें जनभागीदारी आवश्यक है। यदि किसान अपने खर्च कम करना चाहते हैं, तो उन्हें डीजल की लागत कम करनी चाहिए और फ्लेक्स इंजन का उपयोग करना चाहिए, साथ ही सौर ऊर्जा का अधिक उपयोग करना चाहिए। मानसर में किसानों द्वारा उत्पादित बिटुमेन से सड़कें बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में किसान जैव विमानन ईंधन (Bio-aviation fuel) में भी योगदान दे सकेंगे।
उन्होंने सभी स्तरों से समन्वित और बहुआयामी प्रयासों के माध्यम से जल संरक्षण का आह्वान किया। इस अवसर पर कई जल विशेषज्ञों ने अपने कार्यों के बारे में जानकारी दी। कोहिमा-नागालैंड के जल एवं पर्यावरण विशेषज्ञ स्वेदेबिनो नात्सो ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान और विज्ञान का एकीकरण आवश्यक है। के. के. छत्रधारा ने अल नीनो के प्रभाव को कम करने के प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने नदी बेसिन आधारित शासन की अवधारणा भी प्रस्तुत की। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से पद्मश्री सेठपाल सिंह ने बताया कि अत्यंत कम जल स्तर में सिंघाड़ा की खेती कैसे की जाती है।
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से पद्मश्री पुरस्कार विजेता जल योद्धा उमाशंकर पांडे ने मृदा स्तर, मृदा संरचना को बनाए रखने और ताजे पानी को समुद्र में बहने से रोकने के बारे में अपने विचार साझा किए। देहरादून-उत्तराखंड के पद्म भूषण और पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित अनिल प्रकाश जोशी ने गडकरी से उम्मीद जताई कि वे देश को न केवल सड़कों से बल्कि जलमार्ग से भी जोड़ें। उन्होंने कहा कि जल एक तत्व नहीं है, बल्कि इसे वन और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ना आवश्यक है।












