लोकवाहिनी, संवाददाता:तेलअवीव। अमेरिका और ईरान के बीच अब तक कोई डील नहीं हो पाई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच भी मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। हालांकि इस बातचीत ने दोनों नेताओं के बीच तनाव को उजागर कर दिया।
दरअसल, नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ ज्यादा आक्रामक रुख अपनाए। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प से साफ कहा है कि ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लगातार टालना बड़ी गलती होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच हुई बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए थे कि वह आने वाले दिनों में ईरान पर बड़ा हमला कर सकते हैं। लेकिन 24 घंटे के भीतर ही संभावित कार्रवाई पर रोक लगा दी गई। बताया जा रहा है कि इस फैसले से नेतन्याहू खुश नहीं थे। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस युद्ध को ज्यादा लंबा नहीं खींचना चाहते। यही वह मुद्दा है जिस पर दोनों नेताओं के बीच सबसे ज्यादा मतभेद देखने को मिल रहे हैं। एक इजरायली सूत्र ने दावा किया है कि नेतन्याहू ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य एक्शन चाहते हैं जबकि डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के साथ किसी भी तरह के बड़े टकराव से बचना चाहते हैं। मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प कह चुके हैं- बेंजामिन नेतन्याहू वही करेंगे, जो अमेरिका कहेगा।
फ्रांस होर्मुज मिशन में नाटो की भूमिका नहीं चाहता
फ्रांस ने कहा है कि होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए नाटो को शामिल करना सही नहीं होगा। फ्रांस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि नाटो का काम उत्तर अटलांटिक क्षेत्र तक सीमित है। मिडल ईस्ट के मामलों में नाटो की भूमिका सही नहीं मानी जाती। यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है और वहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा पर चर्चा चल रही है। फ्रांस का मानना है कि इस मुद्दे को दूसरे तरीकों से संभाला जाना चाहिए, नाटो के जरिए नहीं। (पेज 6 पर)













