आदमखोर ने चंद्रपुर में 13 महिलाओं पर किया हमला, शूटर तैनात करने और मुआवजे की मांग
लोकवाहिनी, संवाददाता:चंद्रपुर। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में शुक्रवार सुबह तेंदू पत्ता संग्रह कर रहीं चार महिलाएं बाघ के हमले में मारी गईं। वन विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। विदर्भ के चंद्रपुर जिले में आए दिन होने वाले बाघों के हमले अब स्थानीय ग्रामीणों के लिए काल बनते जा रहे हैं। सिंदेवाही तालुका के अंतर्गत आने वाले गुंजेवाही गांव के भट्टी मोहल्ले की 13 महिलाएं रोजाना की तरह खैरीचक क्षेत्र के घने जंगल में तेंदूपत्ता और सूखी लकड़ियां इकट्ठा करने गई थीं। दोपहर के वक्त, जब सभी महिलाएं काम में व्यस्त थीं, तभी झाड़ियों में छिपा एक आदमखोर बाघ ने उन पर पीछे से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से चीख-पुकार मच गई। जब बाकी महिलाएं कुछ समझ पातीं या उन्हें बचाने का प्रयास करतीं, बाघ ने चार महिलाओं को बेरहमी से अपना शिकार बना लिया।
मृतकाओं की पहचान कविता दादाजी मोहरले (45), अनीता दादाजी मोहरले (46), संगीता संतोष चौधरी (40) और सुनीता कौशिक मोहरले (35) के रूप में हुई है। इस वीभत्स घटना की जानकारी मिलते ही गुंजेवाही गांव में कोहराम मच गया और बड़ी संख्या में लाठियां लेकर ग्रामीण जंगल की तरफ भागे, जिसके बाद बाघ शवों को छोड़कर घने जंगल में भाग गया। चंद्रपुर में एक साथ चार मौतों की इस गंभीर और ऐतिहासिक रूप से संवेदनशील घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के आला अधिकारी और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंच गए हैं। वन परिक्षेत्राधिकारी (आरएफओ) के अनुसार, हमलावर बाघ की पहचान करने के लिए खैरीचक के जंगलों में तुरंत ट्रैप कैमरे लगाए जा रहे हैं और वन रक्षकों की विशेष टीमों को गश्त (पैट्रोलिंग) पर तैनात कर दिया गया है। ग्रामीणों की सुरक्षा के मद्देनजर फिलहाल जंगल में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इस घटना के बाद पूरे चंद्रपुर जिले में वन प्रशासन के खिलाफ तीव्र आक्रोश फैल गया है। गुंजेवाही के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस आदमखोर बाघ को तुरंत बेहोश कर पिंजरे में कैद नहीं किया जाता या उसे आदमखोर घोषित कर शूटर तैनात नहीं किए जाते, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई जा रही है। विदर्भ में इस समय पारा 46 डिग्री सेल्सियस के पार चल रहा है, जिससे इंसान ही नहीं बल्कि वन्यजीव भी पानी और ठंडक के लिए बेहाल हैं। जवाहरनगर की व्यस्त मुख्य सड़क पर एक राहगीर ने मोबाइल से बाघ का वीडियो बनाया, जहां वह गर्मी से राहत पाने के लिए एक छोटे से जल स्रोत (पानी के गड्ढे) में आराम करता दिख रहा है। व्यस्त कोंडी रोड और डीएससी पलटन टी-पॉइंट के पास लगातार बाघ दिखने से वाहन चालकों में खौफ का माहौल है।
कब तक कुंभकर्णी नींद सोयेगी सरकार : वडेट्टीवार
बाघ के हमले में चार निर्दोष ग्रामीण महिलाओं की मौत के बाद, कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने राज्य सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा, यह कोई हादसा नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही के कारण हुई हत्या है। विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि तेंदू के पत्ते इकट्ठा करने जंगल गई महिलाओं की जान जाना सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं, बल्कि वन विभाग और सरकार की निष्क्रियता का एक भयावह उदाहरण है। उन्होंने सीधा सवाल उठाया, कब तक कुंभकर्णी नींद सोयेगी सरकार? वन क्षेत्र में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ बैठकें और घोषणाएं हो रही हैं। उन्होंने आलोचना करते हुए कहा कि असल में ग्रामीण नागरिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। उन्होंने आक्रोशपूर्वक पूछा कि क्या सरकार अभी भी आदिवासियों और ग्रामीण नागरिकों के जीवन को महत्व देती है जो अपनी आजीविका के लिए जंगल पर निर्भर हैं।













