नागपुर में जमीयत की शांति बैठक
लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। देश की अधिकांश जनता गाय को न केवल पवित्र मानती है, बल्कि उसे माता का दर्जा भी देती है। ऐसे में यह समझ से परे है कि किस राजनीतिक मजबूरी के चलते सरकार गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने से बच रही है, यह बात जमीयत उलेमा नागपुर जिला अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद साबिर ने कही। वे ईद-उल-अज़हा (बकरी की कुर्बानी) के त्योहार पर शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए मोमिनपुरा स्थित जमीयत उलेमा कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में बोल रहे थे।
मुफ्ती मोहम्मद साबिर ने केंद्र सरकार से मांग की है कि गाय के नाम पर भीड़ द्वारा की जाने वाली लिंचिंग, निर्दोष लोगों की हत्या और इसके जरिए मुसलमानों को बदनाम करने की राजनीति को तत्काल रोका जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि केंद्र सरकार गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करती है, तो समाज में भाईचारा बढ़ेगा और धर्म के नाम पर होने वाले विवाद और हिंसा का अंत होगा। इस मांग का समर्थन करते हुए जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के पूर्व अध्यक्ष हाफिज मसूद ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष हजरत मौलाना सैयद अरशद मदनी ने सबसे पहले यह मांग उठाई थी। नागपुर और कामठी के नागरिक इस आवाज का समर्थन कर रहे हैं और केंद्र सरकार और सांसदों को देश की जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय को तत्काल राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए। महासचिव अतीक कुरैशी, उपाध्यक्ष मोहम्मद जाहिद अंसारी व एजाज पटेल उपस्थित थे।













