संतरनगरी में टेक क्रांति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की तारीफ
लोकवाहिनी संवाददाता
नागपुर। भारत के टेक इतिहास में आज का दिन बेहद ऐतिहासिक साबित हुआ है। ऑरेंज सिटी यानी नागपुर ने वैश्विक स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। मैसेजिंग ऐप Arattai और सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो ने अपना पहला इन-हाउस और पूरी तरह से स्वदेशी सर्वर ‘Nathu La’ (नाथु ला) लॉन्च कर दिया है। सबसे गर्व की बात यह है कि इस हाई-टेक सर्वर को किसी विदेशी लैब में नहीं, बल्कि नागपुर में स्थित जोहो की इंजीनियरिंग टीम ने तैयार किया है।
इस बड़ी कामयाबी की गूंज देश के प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी पहुंची है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नमो ऐप के जरिए इस खबर को शेयर करते हुए जोहो और इसकी नागपुर टीम की जमकर तारीफ की है। पीएम ने इसे मेड इन इंडिया के तहत तकनीकी संप्रभुता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया है।
नागपुर की इंजीनियरिंग टीम का मास्टरस्ट्रोक
जोहो कॉर्पोरेशन का यह ऐतिहासिक प्रोजेक्ट नागपुर फैसिलिटी से ही संचालित और विकसित किया गया है। इसे तैयार करने में जोहो के नागपुर के इंजीनियरों ने 5 साल की कड़ी मेहनत की है। इस प्रोजेक्ट को जोहो के खास स्किलिंग प्रोग्राम सेतु (स्टूडेंट्स एंगेजमेंट फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव अपस्किलिंग) का भी बड़ा सपोर्ट मिला, जिसके तहत सेंट्रल इंडिया (मुख्य रूप से नागपुर और आसपास के क्षेत्रों) के 300 से अधिक इंजीनियरिंग छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन में प्रशिक्षित किया गया और इनमें से कई प्रतिभावान छात्रों ने इस स्वदेशी सर्वर के निर्माण में सीधा योगदान दिया।
नागपुर में तैयार यह सर्वर आर्किटेक्चर, इसके मदरबोर्ड, फर्मवेयर, थर्मल मैनेजमेंट और चेसिस प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से इन-हाउस डिजाइन किया गया है, जिसके लिए जोहो ने 5 से अधिक पेटेंट भी फाइल किए हैं। विदेशी सर्वर पर निर्भरता खत्म: अब तक भारत को अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को चलाने के लिए भारी-भरकम खर्च करके विदेशी सर्वरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन नाथु ला आने से यह निर्भरता काफी कम होगी। इंटेल के सहयोग से बने इस सर्वर की खासियत है कि यह सामान्य सर्वरों के मुकाबले 12 से 18% कम बिजली की खपत करता है। इसके इस्तेमाल से डेटा सेंटर के ऑपरेशनल कॉस्ट में 20 से 30% तक की भारी गिरावट आएगी, जो बढ़ती इंफ्रास्ट्रक्चर कॉस्ट के बीच भारतीय कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। इसके मॉड्यूल और नेटवर्क इंटरफेस कार्ड भारत में ही असेंबल किए गए हैं, जिससे डेटा सिक्योरिटी और अधिक मजबूत होगी।
एक तरफ जहां नागपुर की टीम ने इस सर्वर से देश को बड़ी ताकत दी है, वहीं जोहो के फाउंडर और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने एआई के बढ़ते अंधाधुंध इस्तेमाल पर कड़ी चेतावनी भी जारी की है। हाल ही में वैश्विक विश्वविद्यालयों (यूसी बर्कले) के कंप्यूटर साइंस के छात्रों के खराब नतीजों का हवाला देते हुए वेम्बु ने कहा, एआई आपको तेजी से स्मार्ट तो बना सकता है, लेकिन उतनी ही तेजी से आपको दिमागी रूप से कमजोर और निर्भर भी बना सकता है। छात्रों को हर काम के लिए एआई टूल्स पर निर्भर रहने के बजाय अपनी बुनियादी समझ और सोचने-समझने की क्षमता को मजबूत करना चाहिए। एआई एक सहारा हो सकता है, लेकिन अगर आप पूरी तरह इसी पर टिक गए, तो यह बैसाखी बन जाएगा।
व्यावसायिक बिक्री नहीं
जोहो कॉर्पोरेशन के अनुसार, वे इस सर्वर को बाजार में बेचने के लिए नहीं उतार रहे हैं, बल्कि इसका उपयोग वे अपने खुद के डेटा सेंटर्स और जोहो के अपने 15 करोड़ से अधिक वैश्विक यूजर्स के एआई और क्लाउड वर्कलोड को संभालने के लिए करेंगे। वर्तमान में कंपनी ने लगभग 1,000 नाथु ला सर्वर तैनात किए हैं, जिसे इस साल के अंत तक बढ़ाकर 2,000 करने की योजना है।












