आस्था : 57वें वर्ष की आषाढ़ी वारी में 700 से अधिक वारकरी शामिल
लोकवाहिनी संवाददाता
बुलढाणा। ‘हेचि व्हावी माझी आस, जन्मोन्मी तुझा दास’ संत परंपरा की इसी भावधारा के साथ संत गजानन महाराज की पालकी रविवार, 21 जून को संत नगरी शेगांव से पंढरपुर के लिए रवाना हुई। आषाढ़ी वारी के इस पावन अवसर पर 700 से अधिक वारकरी पालकी के साथ पदयात्रा पर निकले। पालकी प्रस्थान के भव्य और भावपूर्ण दृश्य के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु श्री गजानन महाराज मंदिर परिसर में एकत्रित हुए। श्रीक्षेत्र पंढरपुर में आयोजित आषाढ़ी एकादशी यात्रा महोत्सव में संत गजानन महाराज की पालकी के सहभागी होने का यह 57वां वर्ष है। पालकी के साथ वारकरी, तालकरी, पताकाधारी, रथ, मैना और अश्व दल भी शामिल हैं। ‘जय हरी विठ्ठल’, ‘जय गजानन श्री गजानन’ और ‘गण गण गणात बोते’ के जयघोष तथा ताल-मृदंग की गूंज के बीच श्रद्धालु विट्ठल दर्शन के लिए पंढरपुर की ओर रवाना हुए। संत गजानन महाराज की पालकी लगभग 33 दिनों की पदयात्रा कर 750 किलोमीटर का सफर तय करते हुए 23 जुलाई को श्रीक्षेत्र पंढरपुर पहुंचेगी। पंढरपुर में 23 से 28 जुलाई तक पालकी का पांच दिवसीय प्रवास श्री गजानन महाराज संस्थान की शाखा में रहेगा। शेगांव से प्रस्थान के बाद पालकी श्रीक्षेत्र नागझरी स्थित संत गोमाजी महाराज संस्थान पहुंचेगी। वहां महाप्रसाद ग्रहण करने के बाद शाम को अकोला जिले के पारस में रात्रि विश्राम होगा। 22 जून को पारस से प्रस्थान कर दोपहर में गायगांव तथा रात्रि में भैरद में पालकी का मुकाम रहेगा। इसके बाद 23 और 24 जून को अकोला में दो दिवसीय प्रवास होगा। निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ते हुए पालकी 23 जुलाई को पंढरपुर पहुंचेगी।
■ 29 जुलाई से शुरू होगी वापसी यात्रा
पंढरपुर में प्रवास पूर्ण होने के बाद 29 जुलाई से पालकी की वापसी यात्रा शेगांव के लिए प्रारंभ होगी। पंढरपुर से शेगांव तक लगभग 550 किलोमीटर की पदयात्रा की जाएगी। इस प्रकार आने-जाने का कुल 1300 किलोमीटर का सफर वारकरी भक्तिभाव और उत्साह के साथ पूरा करेंगे। वापसी यात्रा के दौरान 18 अगस्त को खामगांव में अंतिम पड़ाव रहेगा और 19 अगस्त को संत गजानन महाराज की पालकी पुनः संत नगरी शेगांव पहुंचेगी। इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक यात्रा को लेकर वारकरी समुदाय में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है।










