नई दिल्ली। रोहित शर्मा बाहर से भले ही सहज और मजाकिया स्वभाव के दिखते हों लेकिन असल में वह दुनिया के सबसे मजबूत क्रिकेटरों में से एक हैं जो अपनी बात कहने या कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटते। अगर वह डटकर खड़े होने का फैसला करते हैं तो अब उन्हें उसी जज़्बेपन की जरूरत होगी। खासकर तब, जब यह बात सामने आई है कि अजित अगरकर की अगुवाई वाली राष्ट्रीय चयन समिति भविष्य में वनडे टीम में यशस्वी जायसवाल को अधिक मौका देना चाहती है और इसे भारतीय टीम प्रबंधन और मुख्य कोच गौतम गंभीर का भी मौन समर्थन हासिल है। यह सिर्फ रोहित ही जानते हैं कि अभी उनमें कितना दमखम बचा है। विभिन्न प्रारूपों में 513 अंतरराष्ट्रीय मैचों, 20289 रन और 50 शतकों के बाद रोहित को अपनी मर्जी से खेल से विदा लेने का हक है।
लेकिन चयनकर्ताओं को भी सर्वश्रेष्ठ टीम चुनने का अधिकार है जो दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप में खिताब की दावेदार हो। भारत को लॉर्ड्स पर 19 जुलाई के बाद अगला वनडे 27 सितंबर को भारत में वेस्टइंडीज से खेलना है। इसी दौरान टी20 टीम एशियाई खेलों में भाग लेगी। रोहित, गंभीर और अगरकर के आपसी रिश्ते में विश्वास की कमी है।
यह ऐसे तीन व्यक्तियों की कहानी है जिनकी एक दूसरे से अलग सोच है। कुछ साल पहले तक राहुल द्रविड़ ही वह कड़ी थे जिन्होंने भारत में 2023 वनडे विश्व कप और वेस्टइंडीज में 2024 टी20 विश्व कप जैसे दो बेहद सफल अभियानों के दौरान रोहित और अगरकर को एक साथ जोड़े रखा। रोहित की कप्तानी में भारत ने टी20 विश्व कप भी जीता। गंभीर का व्यक्तित्व हालांकि द्रविड़ से बिल्कुल अलग है। रोहित और गंभीर का टकराव क्रिकेटप्रेमियों को सौरव गांगुली और ग्रेग चैपल के दौर की याद दिलाता है।
आईपीएल 2024 के दौरान कोलकाता नाइट राइडर्स वानखेड़े में मुंबई इंडियंस के खिलाफ खेल रही थी और यह पहले से ही पता था कि विश्व कप के बाद द्रविड़ मुख्य कोच का पद छोड़ देंगे। बीसीसीआई एक नये मुख्य कोच की तलाश में थी और गंभीर इस पद के लिए सबसे पसंदीदा उम्मीदवार थे। रोहित के करीबी एक सूत्र ने बताया कि उस शाम वानखेड़े स्टेडियम पर अभ्यास सत्र के बाद रोहित ने जाकर गंभीर से कहा, ‘गोती भाई, इंडियन टीम में आ जाओ।’ जवाब में गंभीर ने कहा, ‘अगर तुम कप्तान रहते हो तो पक्का आ जाऊंगा।’ उस समय कुछ लोगों ने रोहित को आगाह भी किया था, ‘तुम राहुल द्रविड़ की शैली में काम करने के इतने आदी हो कि यह अलग चुनौती होगी।’
क्या इसके लिये तैयार हो। न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू श्रृंखला 0-3 से हारने तक दरारें पड़नी शुरू हो गई थी और ऑस्ट्रेलिया दौरे तक तो रिश्ते में खटास आ चुकी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दो जनवरी को सिडनी टेस्ट से एक दिन पहले रोहित ने टीम के अभ्यास सत्र के दौरान गंभीर और अगरकर से लंबी बात की। कुछ तो गड़बड़ थी और यह साफ था कि रोहित बाहर बैठना चाहते थे, क्योंकि वे रन नहीं बना पा रहे थे। चयन समिति के करीबी सूत्रों ने बताया कि अगरकर नहीं चाहते थे कि रोहित बाहर रहे क्योंकि फिर इंग्लैंड में अगली श्रृंखला के लिये उनके चयन का मसला होता। रोहित ने अगले ही दिन टेस्ट क्रिकेट से विदा ले ली। उन्होंने प्रसारकों को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘मैं दो बच्चों का बाप हूं और मुझे पता है कि मेरे लिये क्या सही है।’
समझा जाता है कि अगरकर और गंभीर स्तब्ध रह गए थे। पहले ही कमजोर पड़ चुके आपसी विश्वास में यह एक और दरार थी। रोहित की कप्तानी में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती और उन्होंने दुबई में न्यूजीलैंड के खिलाफ फाइनल में अहम पारी खेली। इंग्लैंड दौरे के लिये टीम चयन से पहले विरोधाभासी बयान आने लगे। अगर रोहित के करीबी लोगों से पूछा जाए, तो वे कहते हैं कि उन्होंने सभी पांचों मैचों के लिए हामी भरी थी और सिर्फ दो मैच खेलने के बारे में कोई बात नहीं की थी।
असल में गंभीर ने उनसे उन संभावित गेंदबाजों के बारे में भी चर्चा की थी जिनका सामना उन्हें श्रृंखला में करना था। वहीं चयन समिति के करीबी सूत्रों का कहना था कि उन्होंने बताया था कि पहले दो टेस्ट के बाद यह फैसला लेंगे। चयनकर्ताओं ने रोहित से कहा कि उन्हें बाहर रखा जायेगा और इसका जवाब उन्होंने संन्यास के फैसले से दिया। रोहित का विश्वास पूरी तरह से टूट गया जब चैंपियंस ट्रॉफी जीतने के बाद भी उन्हें कप्तानी से हटा दिया गया। इसमें रोहित की कोई गलती नहीं थी कि आईपीएल के बाद भी 50 ओवरों के प्रारूप में मैच नहीं थे।
जब अगरकर ने उन्हें 2027 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ने के बारे में बताया, तो उन्हें बहुत निराशा हुई और बातचीत मुश्किल रही। अगरकर और गंभीर दोनों की सोच एक जैसी थी। स्पष्टता और संवाद की कमी का असर रोहित की सकारात्मक बल्लेबाजी शैली पर पड़ा और वह रन नहीं बना सके। उन्होंने हालांकि सोचा नहीं था कि अपनी सबसे खराब पारियों में से एक खेलने के बाद उनको बाहर रखने की खबरें सामने आयेंगी। अभी भी रोहित, अगरकर और गंभीर की कहानी में कुछ और मोड़ आने बाकी लगते हैं।










