चीन से 96 लोग काठमांडू और 21 भारतीय नागरिक दिल्ली पहुंचे : अब तक 547 मौतें, 977 अब भी लापता
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़ी तबाही मचाई. इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, अब तक 320 भारतीय ऐसे हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है या जो लापता हैं. इसके साथ ही करीब 100 भारतीय मूल के लोग भी संपर्क से बाहर हैं, जिनके पास दूसरे देशों की नागरिकता है. राहत की सबसे बड़ी खबर यह है कि बाढ़ प्रभावित इलाके से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय नागरिक अब दिल्ली पहुंच गए हैं. ये सभी तमिलनाडु के रहने वाले हैं. वहीं नेपाल पुलिस के अनुसार, आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं, जबकि 977 लोग अब भी लापता हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान के बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर और कीचड़ बढ़ने से फिर बाढ़ आने का खतरा मंडरा रहा है. प्रशासन ने लोगों और बचाव दलों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है. अब तक 1,545 लोगों को बचाया गया है, जिनमें 84 का काठमांडू के अस्पतालों में इलाज चल रहा है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, भारतीय राजदूत ने काठमांडू में इन लोगों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना था. इसके अलावा त्रिशूल वन जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 भारतीय नागरिकों को भी बचा लिया गया है. विदेश मंत्रालय के अनुसार चीन की तरफ करीब 400 भारतीय नागरिक मौजूद हैं और वे सुरक्षित हैं. इनमें से कई लोग अपने परिवार के संपर्क में हैं. भारतीय दूतावास भी उनसे लगातार संपर्क कर रहा है. परिवारों ने बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास की हेल्पलाइन के जरिए मदद मांगी है. इसके अनुसार दूतावास चीन के स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है और इन भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था पर काम किया जा रहा है. चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित तरीके से जमीन के रास्ते नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं. अब उन्हें वहां से सुरक्षित निकालने के प्रयास चल रहे हैं. यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों के परिवार अपने परिजनों की खबर पाने के लिए लगातार परेशान हैं. 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाने का आंकड़ा इस चिंता को और गंभीर बनाता है.
नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई गांव खाली कराए गए. झील फटने के बाद नेपाल की प्रमुख नदियों—भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी—का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है. प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इन नदियों के आसपास बसे दर्जनों गांवों को खाली करवा लिया है. स्थानीय नागरिकों और तैनात सुरक्षाकर्मियों को तुरंत प्रभाव से सुरक्षित स्थानों पर जाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी संभावित बड़े जान-माल के नुकसान को टाला जा सके.
चीन में लेवल-4 अलर्ट, तिब्बत में रेस्क्यू ऑपरेशन रुका
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए चीन ने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में चल रहे राहत और बचाव अभियानों को फिलहाल रोक दिया है. प्रशासन ने इलाके में ‘लेवल-4 अलर्ट’ जारी किया है. अधिकारियों का कहना है कि लगातार भूस्खलन और दोबारा बाढ़ आने के भयंकर खतरे को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, क्योंकि बचाव दलों के लिए भी मौके पर काम करना जोखिम भरा हो गया है.
नेपाल-तिब्बत सीमा पर झील फटने से तबाही, हाई अलर्ट जारी
काठमांडू। नेपाल और तिब्बत की सीमा के पास एक बार फिर प्राकृतिक आपदा ने विकराल रूप ले लिया है. चोचेन नदी और पुरेपु सांगपो नदी के संगम के पास बनी एक और कृत्रिम झील के फटने से स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. चीनी प्रशासन ने इस झील के फटने की आशंका मात्र एक दिन पहले ही जता दी थी और सुरक्षा के एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए थे, लेकिन पानी के अचानक तेज बहाव ने बड़े पैमाने पर तबाही का खतरा पैदा कर दिया है. वहीं नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है.











