US के ‘इमिग्रेंट वीज़ा’ प्रोसेस में बदलाव से भारत से US जाने वाले कुछ यात्रियों में अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि, सभी तरह के US वीज़ा पर बैन नहीं लगाया गया है। US स्टेट डिपार्टमेंट ने कुछ इमिग्रेंट वीज़ा एप्लिकेंट के लिए ‘पब्लिक चार्ज बॉन्ड’ प्रोसेस शुरू किया है। इस प्रोसेस में यह देखा जाता है कि US जाने के बाद संबंधित व्यक्ति के सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर रहने की संभावना है या नहीं। सिर्फ़ चुने हुए एप्लिकेंट को ही इस बॉन्ड की ज़रूरत हो सकती है। यह प्रोसेस अभी वैलिड वीज़ा पर असर नहीं डालता है।
इन बदलावों से भारत-US ट्रैवल की डिमांड पर असर पड़ने की संभावना है। दिए गए डेटा के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच लगभग 9 लाख 66 हज़ार भारतीयों ने US का दौरा किया। पिछले साल इसी समय में यह आंकड़ा लगभग 1 लाख 80 हज़ार था। इसलिए, रिश्तेदारों से मिलने, टूरिज्म के लिए या दूसरे कारणों से US जाने की योजना बना रहे कुछ भारतीय ज़्यादा सावधानी बरत सकते हैं। अगर वीज़ा प्रोसेस में अनिश्चितता बनी रहती है, तो टूरिज्म सेक्टर थाईलैंड, वियतनाम, मलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर जैसे आसान वीज़ा प्रोसेस वाले देशों की तरफ़ यात्रियों का झुकाव बढ़ने की संभावना जता रहा है।
भारत-US एयर ट्रैफ़िक पर भी पहले से ही दबाव है। दिए गए डेटा के मुताबिक, अगस्त 2026 में दोनों देशों के बीच हर हफ़्ते 42 डायरेक्ट फ़्लाइट थीं, जबकि अगस्त 2025 में यह संख्या 97 थी। हफ़्ते की सीटींग कैपेसिटी भी 28,860 से घटकर 12,096 हो गई है। इसलिए, अगले कुछ महीने एयरलाइंस, ट्रैवल सर्विसेज और टूरिज्म इंडस्टी के लिए अहम होंगे। इस बीच, US ने इमिग्रेंट वीज़ा एप्लिकेंट्स के उनके देश में संबंधित एंबेसी या कॉन्स्यूलेट में इंटरव्यू के इंतज़ाम को साफ़ कर दिया है। इसलिए, US जाने वालों के लिए वीज़ा के टाइप के हिसाब से ऑफिशियल नियम चेक करना और आगे का प्लान बनाना ज़रूरी होगा।













