कनाडा से वार्ता में अच्छी प्रगति : गोयल
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत कई देशों और समूहों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) पर बातचीत कर रहा है, चिली के साथ वार्ता समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब है, जबकि कनाडा के साथ बातचीत में अच्छी प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका के नेतृत्व वाले दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएससीयू) के साथ बातचीत शुरू हो गई है। भारत और एसएससीयू ने अगस्त में तरजीही व्यापार समझौते की दिशा में औपचारिक वार्ता शुरू करने के लिए विचारार्थ विषयों (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए थे। एसएससीयू के पांच सदस्य बोत्सवाना, इस्वातिनी (पूर्व में स्वाजीलैंड), लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका हैं।
गोयल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘मुझे लगता है कि चिली के साथ बातचीत समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब है। कनाडा के साथ बहुत अच्छी प्रगति हो रही है। हमने एसएससीयू के साथ बातचीत अभी शुरू की है, इसलिए इसे पूरा होने में कुछ समय लग सकता है।’ यह यहां दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर आए हुए हैं।
अन्य समझौतों के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैक्सिको जल्द से जल्द शुरुआती चरण का व्यापार समझौता करने को लेकर ‘बहुत उत्सुक’ है। गौरतलब है कि वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल भारत-मैक्सिको व्यापार और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए दो दिन की यात्रा पर मैक्सिको सिटी में हैं। वाणिज्य विभाग ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी, ‘इस यात्रा के दौरान विचारार्थ विषयों (टीओआर) पर हस्ताक्षर के साथ तरजीही व्यापार समझौते (पीटीए) पर बातचीत शुरू की जाएगी। इसके अलावा द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए मैक्सिको सरकार और कारोबारी समुदाय के साथ बैठकें भी होंगी।’ भारत और मैक्सिको के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में नौ प्रतिशत से अधिक घटकर 7.83 अरब डॉलर रह गया। इसमें भारत का निर्यात 5.72 अरब डॉलर और आयात 2.1 अरब डॉलर था। व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है।
गोयल ने उम्मीद जताई कि चुनाव के बाद ब्राजील में सरकार की निरंतरता से दक्षिण अमेरिकी व्यापार समूह मर्कोसुर के साथ तरजीही व्यापार समझौते (पीटीए) का दायरा बढ़ाने के लिए बातचीत तेज करने में मदद मिलेगी। मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का एक व्यापार समूह है जिसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, बोलीविया, उरुग्वे और पराग्वे शामिल हैं। भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौता एक जून, 2009 को लागू हुआ था। इस समझौते के तहत भारत ने 450 शुल्क श्रेणियों या उत्पाद श्रेणियों पर और मर्कोसुर पक्ष ने 452 शुल्क श्रेणियों पर तरजीही शुल्क रियायतें दी थीं। अब दोनों पक्ष समझौते का दायरा बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और इजराइल के साथ बातचीत ‘स्वाभाविक रूप से’ धीमी है और इसे आगे बढ़ने में कुछ समय लग सकता है। उन्होंने कहा, ‘हालांकि, हम बातचीत तेज करने के लिए तैयार हैं।’ ‘जीसीसी में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। इसकी स्थापना 1981 में एक राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा समूह के रूप में हुई थी। भारत का पहले से ही संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के साथ व्यापार समझौता है। गोयल ने कहा, ‘यूरेशिया मुक्त व्यापार समझौता केवल वस्तुओं से संबंधित है, इसमें सेवाएं शामिल नहीं हैं। इसलिए हम अभी इस समझौते में शामिल होने के लाभों का आकलन कर रहे हैं।’
भारत और पांच देशों वाले यूरेशियाई आर्थिक संघ (ईएईयू) ने पिछले साल 20 अगस्त को इस समझौते पर औपचारिक बातचीत शुरू करने के लिए विचारार्थ विषयों पर हस्ताक्षर किए थे। बातचीत का पहला दौर नवंबर 2025 में हुआ था। उन्होंने कहा, ‘कई अन्य देश भी हमसे बातचीत कर रहे हैं। दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता करना चाहता है। मिस्र ने हमें यह चर्चा करने के लिए वहां आमंत्रित किया है कि हम किस तरह मिलकर आगे काम कर सकते हैं। अन्य अफ्रीकी देश भी हमसे संपर्क कर रहे हैं। ये या तो पूरे अफ्रीका के साथ, अफ्रीकी संघ के साथ या अलग-अलग क्षेत्रों में मुक्त व्यापार समझौते करना चाहते हैं।’
अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर उन्होंने कहा कि भारत को अन्य देशों की तुलना में प्रतिस्पर्धी लाभ मिलेगा और तरजीही पहुंच प्राप्त होगी। भारत और अमेरिका ने फरवरी में द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) के पहले चरण के रूप में इसे अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। हालांकि, अमेरिका में शुल्क संबंधी परिदृश्य में बदलाव के कारण इस समझौते पर बातचीत हो रही है। इन वार्ताओं के लिए क्षमता निर्माण के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस बात पर विशेष ध्यान दे रहे हैं कि बातचीत और उससे जुड़े अनुभवों तथा प्रयासों को एक बार की कवायद बनकर न रह जाने दिया जाए।
उन्होंने कहा, ‘इसलिए पिछले करीब तीन वर्षों में हमने उचित नियमावली तैयार की है। यह मुख्ययमंत्री और व्यवस्थित तरीके से मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की तरह मार्गदर्शन करती है।’ ‘हम जिस भी मुक्त व्यापार समझौते में प्रवेश करते हैं, उसके भविष्य में संदर्भ के इस्तेमाल और अधिकारियों को मार्गदर्शन देने के लिए काफी दस्तावेज तैयार करते हैं, क्योंकि अधिकारी बदलते रहते हैं।’ मंत्री यहां दो दिन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। उनके साथ एक कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भी आया हुआ है।













