सुनील तटकरे के खुलासे से राजनीतिक गलियारों में हलचल
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस के खेमे में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। प्रफुल्ल पटेल ने गुरुवार को अस्पताल में उपचार करा रहे शरद पवार से मुलाकात की। प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विलय की चर्चा के बीच सुनील तटकरे ने बड़ा खुलासा किया है। तटकरे ने कहा है कि यदि अजितदादा जीवित होते, तो 12 फरवरी को ही राष्ट्रवादी कांग्रेस का विलय हो गया होता। तटकरे के इस दावे से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। सुनील तटकरे ने राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय पर टिप्पणी करते हुए राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। सांसद सुनील तटकरे ने कहा कि फिलहाल दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है, लेकिन यदि अजितदादा होते तो दोनों राष्ट्रवादी कांग्रेस आज एक साथ दिखाई देतीं।
अजित पवार के निधन के कारण यह चर्चा पीछे छूट गई। अजित पवार जीवित होते तो विलय के लिए बताई जा रही 12 फरवरी की तारीख निश्चित हो गई होती। राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय को लेकर उनके इस बड़े बयान के बाद पार्टी के भीतर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सुनील तटकरे के दावे पर शरद पवार गुट के अनिल देशमुख ने कहा, सुनील तटकरे शुरू से ही राष्ट्रवादी कांग्रेस के विलय के विरोध में थे। उस समय अजित पवार और शरद पवार के साथ बैठकें हुई थीं। हम कह रहे थे कि सरकार से बाहर आकर दोनों गुटों को एक साथ आना चाहिए, लेकिन उस समय सुनील तटकरे ने कहा था कि ऐसी कोई बैठक हुई ही नहीं। उनका कहना था कि जो बैठक हुई थी, वह किसी दूसरे कारण से हुई थी। अब वे कह रहे हैं कि अजितदादा ने विलय का विचार रखा था। वे कह रहे हैं कि 12 फरवरी को विलय हो जाता, लेकिन उस समय आप इसका विरोध कर रहे थे। आप कौन-सा एजेंडा चला रहे थे, यह हमें पता नहीं है।
10 नवंबर को महाराष्ट्र में क्या होगा?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि अमित शाह से मुलाकात के बाद प्रफुल्ल पटेल का शरद पवार से मिलना सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं है। महाराष्ट्र में बदलते समीकरणों के बीच शरद पवार का 10 तारीख के बाद बैठने का बयान इस बात का साफ इशारा है कि आने वाले दिनों में एनसीपी के दोनों धड़ों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। शरद पवार गुट लगातार राष्ट्रवादी कांग्रेस के दोनों गुटों को एक करने की वकालत करता रहा है। वहीं सुनेत्रा पवार गुट अब तक इससे इनकार करता रहा। लेकिन पिछले कुछ दिनों से चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों ने एक बार फिर से इस चर्चा को हवा दे दी है।
शरद पवार से राजनीतिक मतभेद, कड़वाहट नहीं : पटेल
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राकांपा (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार के साथ उनके संबंध हमेशा सौहार्दपूर्ण और पारिवारिक रहे हैं तथा उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों के बीच कभी कोई कड़वाहट नहीं रही। पटेल ने बृहस्पतिवार रात मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में शरद पवार से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि वह वरिष्ठ नेता का हालचाल जानने के लिए अस्पताल पहुंचे थे और उनकी सेहत अच्छी है। पटेल ने कहा, राजनीतिक मतभेद जरूर थे, लेकिन हमारे बीच कभी कोई कड़वाहट नहीं रही। मैं समय-समय पर पवार साहब से मिलता रहा हूं। हमारे पारिवारिक संबंध हैं और ये आगे भी बने रहेंगे। उन्होंने बताया कि दोनों के बीच मौजूदा राजनीतिक हालात पर भी चर्चा हुई।
पटेल ने कहा कि शरद पवार पूरी तरह स्वस्थ नजर आ रहे थे और अपने खास अंदाज में मुस्कुरा रहे थे। राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार (85) को बुधवार को दक्षिण मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले उन्हें पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक से छुट्टी दी गई थी, जहां सोमवार से उनका इलाज चल रहा था। शरद पवार द्वारा स्थापित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) में 2023 में उस समय विभाजन हो गया था, जब प्रफुल्ल पटेल समेत पार्टी के कुछ नेता दिवंगत अजित पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे। इसके बाद अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट को पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न मिल गया, जबकि शरद पवार के गुट को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) नाम दिया गया। प्रफुल्ल पटेल की शरद पवार से यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब राकांपा के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इस बैठक में पार्टी प्रमुख सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ तथा जय शामिल नहीं हुए थे। अमित शाह के साथ यह बैठक ऐसे समय हुई, जब ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि राकांपा नेतृत्व पार्टी में पार्थ पवार के बढ़ते प्रभाव से खुश नहीं है।














