नई दिल्ली: कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बिहार दौरे से पहले शुक्रवार को उनसे तीन महत्वपूर्ण सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि पीएम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछड़ों, अति पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को संविधान की नौवीं अनुसूची में क्यों शामिल नहीं किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अपने प्रचार अभियान की शुरुआत समस्तीपुर जिले में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की जन्मस्थली कर्पूरी ग्राम से करेंगे। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “प्रधानमंत्री के लिए तीन सीधे सवाल हैं।”
रमेश ने याद दिलाया कि कर्पूरी ठाकुर ने 1978 में पिछड़ों को 26 प्रतिशत आरक्षण देकर सामाजिक न्याय की ऐतिहासिक नींव रखी थी। उन्होंने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार के वैचारिक पूर्वज—जनसंघ और आरएसएस—ने उस समय कर्पूरी ठाकुर की आरक्षण नीति का विरोध नहीं किया और सड़कों पर अपमानजनक नारे नहीं लगाए। रमेश ने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री अब उस ऐतिहासिक गलती के लिए माफ़ी मांगेंगे।
कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने जाति जनगणना की मांग को “अर्बन नक्सल एजेंडा” कहकर दलितों, पिछड़ों, अति-पिछड़ों और आदिवासियों के अधिकारों का अपमान किया। उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार ने 20 जुलाई 2021 को संसद और 21 सितंबर 2021 को उच्चतम न्यायालय में जाति जनगणना कराने से इनकार किया।
रमेश ने अंतिम सवाल उठाया कि बिहार में पिछड़ों, अति-पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों के लिए 65 प्रतिशत आरक्षण को विधानसभा द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद 9वीं अनुसूची में क्यों नहीं डाला गया। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने 1994 में तमिलनाडु के 69 प्रतिशत आरक्षण को नौवीं अनुसूची में शामिल कर सुरक्षा दी थी, जबकि बिहार के 65 प्रतिशत आरक्षण को अभी तक यह सुरक्षा क्यों नहीं मिली।
कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री को जनता और वंचित वर्गों के प्रति स्पष्ट जवाब देना चाहिए।










