नयी दिल्ली। भारत की चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का दूसरा चरण शुरू करने की घोषणा की है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि यह प्रक्रिया अब देश के 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, गुजरात, छत्तीसगढ़, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में चलाई जाएगी। इसमें लगभग 51 करोड़ मतदाता शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि SIR का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि योग्य मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से न छूटे और जिन लोगों के नाम किसी भी प्रकार से अवैध या अयोग्य हैं, उन्हें सूची से हटाया जा सके। SIR की गणना प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू होगी, जबकि मसौदा मतदाता सूची 9 दिसंबर को और अंतिम सूची 7 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।
आयोग ने स्पष्ट किया कि असम में मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर अलग से घोषणा की जाएगी, क्योंकि वहाँ भी अगले वर्ष विधानसभा चुनाव संभावित हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, स्वतंत्रता के बाद यह नौवीं बार है जब SIR किया जा रहा है। पिछला गहन पुनरीक्षण वर्ष 2002-04 में हुआ था। कुमार ने बताया कि बिहार में SIR सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और खास बात यह रही कि इस प्रक्रिया पर कोई अपील नहीं आई। बिहार में अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को जारी की जा चुकी है और अब वहाँ मतदान की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को सुचारू रूप से लागू करने के लिए सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ दो चरण की बैठकें पहले ही कर चुका है। कई राज्यों ने अपनी पिछली SIR के बाद की मतदाता सूचियाँ अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी हैं। आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि विभिन्न राज्यों में अंतिम SIR 2002 से 2004 के बीच पूर्ण हुआ था और वर्तमान सूची का आधार वही पुरानी सूची रहेगी, जैसा कि बिहार में किया गया। अवैध विदेशी मतदाताओं की पहचान कर उन्हें सूची से बाहर करना इस प्रक्रिया का एक अहम उद्देश्य है, खासकर बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से आए अवैध प्रवासियों पर रोक के मद्देनजर यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इधर पश्चिम बंगाल में SIR की घोषणा से ठीक पहले बड़े पैमाने पर प्रशासनिक बदलाव ने सियासी हलचल तेज कर दी है। बंगाल सरकार ने सोमवार को 200 से अधिक अधिकारियों का तबादला कर दिया, जिनमें 61 IAS और 145 WBCS (एक्जीक्यूटिव) अधिकारी शामिल हैं। दस जिलाधिकारियों के साथ कई ADM, SDO और विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं के प्रमुख अधिकारियों का भी स्थानांतरण किया गया है। दावा किया जा रहा है कि ये सभी अफसर आगामी SIR प्रक्रिया में नोडल भूमिका निभाने वाले थे और आयोग की औपचारिक घोषणा के बाद ऐसा फेरबदल करना संभव नहीं होता।
इस कदम पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक जंग छिड़ गई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी प्रशासन मतदाता सूची से फर्जी नाम हटाने की प्रक्रिया से घबराया हुआ है और इसलिए अंतिम समय में अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादले किए गए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह सिर्फ नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसे SIR से जोड़कर देखना राजनीति से प्रेरित बयानबाज़ी है।
चुनाव आयोग की इस कवायद को देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह सुनिश्चित करेगा कि मतदाता सूची पूरी तरह पारदर्शी और सटीक हो, क्योंकि मताधिकार हर नागरिक का संवैधानिक हक है और उसके संरक्षण की ज़िम्मेदारी आयोग की प्राथमिकता है।











