लोकवाहिनी, संवाददाता,गुवाहाटी। असम विधानसभा ने गुरुवार को बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने वाला अहम बिल पास कर राज्य में एक बड़ा कानूनी बदलाव कर दिया है। इस बिल के पारित होने के साथ ही बहुविवाह को आपराधिक कृत्य माना जाएगा और दोषी को अधिकतम 10 साल की सज़ा हो सकेगी। अपराध दोहराने पर हर बार सज़ा दोगुनी होगी। साथ ही पीड़ित को $1.40$ लाख रुपये मुआवजा देने का भी प्रावधान है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे महिलाओं को सशक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया और आश्वासन दिया कि अगर वह अगले कार्यकाल में फिर से मुख्यमंत्री बनते हैं तो राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया जाएगा।गुरुवार को पारित इस बिल में साफ किया गया है कि यह कानून सभी समुदायों पर लागू होगा। हालाँकि, अनुसूचित जनजाति (ST) के लोगों और छठी अनुसूची वाले क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
मुख्यमंत्री सरमा ने साफ कहा कि बिल किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है और इसका उद्देश्य सभी समाजों में समानता और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। बहस के दौरान सरमा ने कहा कि बहुविवाह सिर्फ मुस्लिम समाज तक सीमित नहीं है, हिंदू समाज में भी ऐसे मामले मिलते हैं और कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा। उन्होंने कहा कि इसे इस्लाम-विरोधी बिल बताने वाली धारणाएँ गलत हैं। सीएम ने विपक्ष से आग्रह किया कि वे संशोधन प्रस्ताव वापस लें ताकि पूरा सदन एकमत होकर महिलाओं की सुरक्षा के लिए मज़बूत सन्देश दे सके।









