प्राचीन भारत और अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधों पर नई खोज
सोलापुर से एक रोचक पुरातात्विक खबर सामने आई है। बोरामणी वन क्षेत्र में पुरातत्वज्ञों को भारत का अब तक का सबसे बड़ा दग्धी चक्रव्यूह मिला है। यह चक्रव्यूह 15 वर्तुलों वाला है और विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहली से तीसरी शताब्दी के रोमन क्रेट नाणों जैसी रचना रखता है।
छानबीन के दौरान यह पता चला कि यह चक्रव्यूह केवल धार्मिक उद्देश्य के लिए नहीं बनाया गया था, बल्कि रोमन व्यापारी नेविगेशन मार्कर के रूप में भी इस्तेमाल होता था। तज्ज्ञों का मानना है कि इस रचना का निर्माण प्राचीन व्यापारियों को समुद्री और स्थलमार्ग पर मार्गदर्शन देने के लिए किया गया होगा।
इतिहासकार नितीन अणवेकर के अनुसार, उस समय मसाले और रेशम के बदले सोना, वाइन और कीमती रत्नों का व्यापार होता था। इस खोज से भारत के प्राचीन व्यापारी इतिहास को नया आयाम और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों की समझ मिल सकती है।
ड्रोन पायलट भरत छेडा ने इस स्थल का विस्तृत ड्रोन फुटेज तैयार किया है, जिसने शोधकर्ताओं को इस विशाल चक्रव्यूह की संरचना और आयाम का सटीक विश्लेषण करने में मदद की।
यह खोज प्राचीन भारत के धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक इतिहास पर नई रोशनी डालती है और इसे पुरातत्व और इतिहास अध्ययन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।











