नागपुर के बर्डी क्षेत्र सहित कुछ इलाकों से हाल ही में भिखारी हटाए जाने के बाद सवाल उठे थे कि आगे उनका क्या होगा। इस सवाल का जवाब जानने के लिए नागपुर महानगरपालिका द्वारा संचालित आस्था शेल्टर होम का दौरा किया गया।
महानगरपालिका के समाज कल्याण विभाग के तहत शहर के सार्वजनिक स्थानों पर भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों को शेल्टर होम में प्रवेश कराया जाता है। शेल्टर होम में पहुँचने के बाद उनकी प्राथमिक चिकित्सा जांच की जाती है, भोजन, आश्रय और कपड़ों की व्यवस्था की जाती है और उनकी पहचान कर परिवार खोजने का काम किया जाता है।
यदि परिवार मिल जाता है तो उन्हें समुपदेशन के माध्यम से पुनर्वास कराया जाता है। वहीं, जिनका परिवार नहीं मिलता या जो निराधार हैं, उनके लिए कौशल प्रशिक्षण, रोजगार मार्गदर्शन और स्वावलंबन के कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
नागपुर महानगरपालिका के अधिकारियों का कहना है कि सड़क से हटाना लक्ष्य नहीं है, बल्कि भिक्षुओं को सम्मानपूर्वक जीवन जीने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। इसके लिए प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएं और समाज की भागीदारी भी अहम है।
शहर में हाल ही की कार्रवाइयों के बाद, नागपुर महानगरपालिका ने भिक्षुओं के पुनर्वास में मानवीय दृष्टिकोण से ठोस कदम उठाए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन केवल भिकारी हटाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि उनके समान और स्वावलंबी जीवन के लिए प्रयासरत है।











