लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के चीफ मोहन भागवत ने रविवार को साफ किया कि वह उम्र के इस पड़ाव पर भी संगठन की आज्ञा का पालन करेंगे। यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे।
संघ के एक शताब्दी कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि 75 साल की उम्र पूरी करने के बाद उन्होंने संघ को अपनी स्थिति के बारे में बताया, लेकिन संघ ने उन्हें कार्य जारी रखने को कहा है। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि सरसंघचालक बनने के लिए क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र या ब्राह्मण होना कोई योग्यता नहीं है। जो व्यक्ति संगठन के लिए काम करता है, वही सरसंघचालक (आरएसएस प्रमुख) बनता है।
भागवत रविवार को मुंबई में आरएसएस के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि वीर सावरकर को भारत रत्न दिया गया तो इससे पुरस्कार की गरिमा और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सावरकर को किसी पुरस्कार की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे पहले ही देशवासियों के दिलों में स्थान बना चुके हैं।
उन्होंने कहा, “मैं उस समिति का हिस्सा नहीं हूँ जो इस पर फैसला करती है, लेकिन अगर किसी से मुलाकात होगी तो जरूर पूछूँगा कि इसमें देरी क्यों हो रही है। अगर सावरकर को भारत रत्न दिया जाता है तो यह पुरस्कार के लिए ही सम्मान होगा और उसकी प्रतिष्ठा और बढ़ेगी। बिना किसी सम्मान के भी सावरकर जनता के दिलों पर राज करते हैं।”








