लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेता दावा कर रहे हैं कि भारत विश्व गुरु बनेगा। सरकार ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ का लक्ष्य रखा है। कई लोगों को इस पर संदेह है, लेकिन मेरा विश्वास कीजिए, भारत निश्चित रूप से विश्व गुरु बनेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नागपुर के जामठा स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के आध्यात्मिक केंद्र में आयोजित राज्यव्यापी अभियान के शुभारंभ के अवसर पर बोल रही थीं।
यह अभियान समाज में सद्भाव, एकता और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। इस समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, राज्य के राजस्व एवं पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, ब्रह्माकुमारीज़ के अतिरिक्त महासचिव बी.के. मृत्युंजय भाई, राजयोगिनी बी.के. चंद्रिका दीदी और नागपुर केंद्र की प्रमुख राजयोगिनी बी.के. रजनी दीदी उपस्थित थीं।
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा कि भारत आध्यात्मिकता, धर्म और आस्था का देश है। इसी अटूट आस्था के बल पर हमारा देश एक बार फिर विश्व गुरु के नाम से जाना जाएगा। विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए नागरिकों को एक-दूसरे पर भरोसा करना चाहिए और मिलकर आगे बढ़ना चाहिए। एक समय था जब भारत को ‘सुनहरा धुआँ’ उगलने वाले देश के रूप में जाना जाता था। उस समय लोगों में अपार विश्वास और सहानुभूति थी। हमें उस विरासत को पुनर्जीवित करना होगा।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग इसे ‘विकसित भारत’ कह सकते हैं और कुछ लोग इसे ‘डिजिटल युग’ कह सकते हैं, लेकिन इन सबका आधार हमारी संस्कृति में धर्म और आध्यात्मिकता है। आने वाले युग को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए, सभी को पहले स्वयं में सकारात्मक परिवर्तन लाने होंगे। जब हम आस्था के साथ कदम बढ़ाएंगे, तभी ईश्वर और मनुष्य का मिलन होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विश्वास व्यक्त किया कि यह राज्यव्यापी अभियान लोगों के मन में आस्था की लौ प्रज्वलित करेगा और भारत को विश्व गुरु बनाने के संकल्प को मजबूत करेगा।
ब्रह्माकुमारीज़ के राज्यव्यापी अभियान का उद्देश्य समाज में आस्था, सद्भाव, एकता और मानवता के मूल्यों के संरक्षण को बढ़ाना है। इस अभियान में आठ मुख्य सिद्धांत परिभाषित किए गए हैं। इसमें व्यसन मुक्त समाज का निर्माण, सतत जीवनशैली, स्वच्छता, कर्तव्य बोध, मानवता के प्रति कर्तव्यपरायणता, मूल्य आधारित शिक्षा, शुद्ध एवं संयमित जीवन योग, हरित एवं सतत महाराष्ट्र और सद्भाव के माध्यम से सुखी जीवन का निर्माण शामिल है।











