लोकवाहिनी, संवाददाता:नागपुर। शहर के बढ़ते विस्तार के साथ पर्यावरणीय समस्याएं और भी गंभीर होती जा रही हैं। नागपुर नगर निगम की पर्यावरण स्थिति रिपोर्ट ने नाग नदी में बढ़ते सीवेज और इसके भयावह परिणामों को स्पष्ट रूप से उजागर किया है। इस रिपोर्ट ने एक गंभीर प्रश्न उठाया है। नाग नदी से बहने वाला दूषित पानी गोसीखुर्द राष्ट्रीय परियोजना में मिल रहा है, तो क्या इस परियोजना को वास्तव में न्याय मिलेगा? यह प्रश्न जल विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण महाजन ने उठाया है।
40 टीएमसी क्षमता वाली गोसीखुर्द परियोजना को पूर्वी विदर्भ के लिए जीवन रेखा माना जाता है। यह परियोजना सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, कई नालों, औद्योगिक अपशिष्ट जल और घरेलू मल-मूत्र के नाग नदी में मिलने से नदी का पानी अत्यधिक प्रदूषित हो गया है। इस पानी को गोसीखुर्द बांध में संग्रहित किया जाता है और वहीं से कृषि कार्यों में उपयोग किया जाता है। डॉ. प्रवीण महाजन ने आशंका व्यक्त की है कि इस पानी का फसलों पर और अप्रत्यक्ष रूप से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। नगर निगम की सीमा के भीतर स्थित अनधिकृत नाले सैकड़ों स्थानों पर नाग नदी में मिल जाते हैं। इन नालों से मल-मूत्र बिना किसी उपचार के सीधे नदी में बहा दिया जाता है। शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता अपर्याप्त है और यह भी सामने आया है कि कई स्थानों पर ये संयंत्र ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, प्रतिदिन लाखों लीटर अशुद्ध जल नाग नदी में मिल जाता है, जिससे गोसीखुर्द एक जहरीला जलाशय बन गया है। यह दूषित जल परियोजना को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है और पानी से दुर्गंध आ रही है। बांध में जमा पानी स्वच्छ नहीं है। इसके कारण जलीय जीव मर रहे हैं और कई संवेदनशील प्रजातियां नष्ट हो रही हैं। जलीय पौधे तेजी से बढ़ रहे हैं और पानी की सतह पर जाले की तरह फैले हुए प्रतीत होते हैं।
इसमें रासायनिक तत्वों, भारी धातुओं और जीवाणुओं की मात्रा चिंताजनक है। इस पानी का सेवन खतरनाक होता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों में त्वचा रोग, पाचन तंत्र संबंधी विकार और अन्य बीमारियों की शिकायतें बढ़ रही हैं, डॉ. प्रवीण महाजन ने इस ओर ध्यान दिलाया है। इस समस्या का कृषि क्षेत्र पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। दूषित पानी से फसलों की सिंचाई के कारण मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है। फसलों में रासायनिक अवशेष बढ़ रहे हैं और विषैले तत्व खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर रहे हैं। डॉ. महाजन ने कहा कि इससे कृषि उत्पादन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और दीर्घकाल में यह समस्या और भी गंभीर हो जाएगी। डॉ. महाजन ने आरोप लगाया कि प्रशासन इन सभी स्थितियों को नजरअंदाज कर रहा है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने इस बारे में कई बार सवाल उठाए हैं। डॉ. महाजन के अनुसार, भारतीय जल संसाधन संस्थान जैसे जल क्षेत्र में कार्यरत संगठनों ने बार-बार इस मुद्दे को उठाया है, सेमिनार आयोजित किए हैं और इसका समाधान खोजने का प्रयास किया है, लेकिन नगर निगम इस समस्या को कोई महत्व नहीं देता है।
नाग नदी की सफाई के लिए ठोस कदम उठाने की जिम्मेदारी नगर निगम की है। हालांकि, नगर निगम इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। नीरी ने नगर निगम को रिपोर्ट सौंपी है, लेकिन ऐसा लगता नहीं कि नगर निगम इस पर कोई ठोस कार्य योजना बना रहा है। सिर्फ कागजी कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा।










