50 साल में पहली बार किसी भी राज्य में नहीं होगी लेफ्ट सरकार
नई दिल्ली। भारतीय राजनीति में अपनी खास विचारधारा और मजबूत पकड़ के लिए मशहूर वामपंथी दल आज अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। ताजा चुनावी रुझान बताते हैं कि पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा कि जब देश के किसी भी राज्य में वामपंथियों की सरकार नहीं होगी। केरल, जो इनका सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था लेकिन 2026 के चुनावी नतीजे अब इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अब उनके हाथ से यह आखिरी किला भी खिसक रहा है। वामपंथ के इस पतन के पीछे कई ऐतिहासिक कारणों को जिम्मेदार माना जाता है। 1996 में, जब सीपीआई-एम के दिग्गज नेता ज्योति बसु प्रधानमंत्री बनने के बेहद करीब थे तब उनकी पार्टी के पोलित ब्यूरो ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था जिसे बसु ने खुद ही उसे ऐतिहासिक भूल करार दिया था। साल 2008 तक वामपंथी दल राष्ट्रीय राजनीति में इतने प्रभावशाली थे कि मनमोहन सिंह सरकार उनकी मर्जी पर टिकी थी लेकिन परमाणु समझौते के मुद्दे पर समर्थन वापस लेना उनके प्रभाव को कम करने की शुरुआत साबित हुई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की शुरुआत बहुत शानदार रही थी।








