आगमन : आस्था और उल्लास के साथ 11 दिवसीय गणेश उत्सव शुरू
लोकवाहिनी, संवाददाता
मुंबई। महाराष्ट्र और देशभर में गणेशोत्सव का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है और लाडले गणराज की जगह-जगह धूमधाम से स्थापना हुई. घर-घर से लेकर भव्य सार्वजनिक मंडलों तक गणपति बाप्पा मोरया के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है. मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग का राजा, पुणे के मानाचे गणपति और नागपुर-कोल्हापुर सहित पूरे राज्य के मंडलों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है. केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि दिल्ली, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और अन्य राज्यों में भी सार्वजनिक गणेशोत्सव की भव्यता हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी बढ़ी है.
कई मंडलों ने इस वर्ष सामाजिक संदेश देने वाली, गढ़-किलों की ऐतिहासिक झांकियों और पर्यावरणपूरक मूर्तियों पर विशेष जोर दिया है. वहीं सोमवार को महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई की गलियां-कूचे गणपति बाप्पा मोरया के जयकारों से गूंज उठे और ढोल-नगाड़ों बीच श्रद्धालु भगवान गणेश की छोटी-बड़ी प्रतिमाओं को अपने घरों व मोहल्लों के पंडालों में विराजमान करने के लिए ले जाते नजर आए. मुंबई की संकरी गलियों से लेकर मनमोहक कलाकृतियों से सजे भव्य मोहल्ला पंडालों तक, हर ओर भगवान गणेश के स्वागत की तैयारियां दिखाई दीं. आराध्य देव के वार्षिक आगमन ने मानो पूरे शहर को भक्ति और उत्सव के एक सूत्र में बांध दिया है.
गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी (25 सितंबर) को होगा. इस दिन श्रद्धालु भव्य शोभायात्रा निकालते हुए गणपति की प्रतिमाओं को शहर के समुद्र तटों तक ले जाएंगे, जहां विधिवत और श्रद्धा के साथ उनका विसर्जन किया जाएगा. बड़े गणेश मंडलों ने जहां पिछले कुछ सप्ताह के दौरान ही अपनी विशाल प्रतिमाओं को पंडालों में विराजमान कर दिया था, वहीं छोटे मंडलों और परिवारों ने रविवार रात भक्ति गीतों, जयघोष, ढोल-नगाड़ों और गुलाल के बीच अपने आराध्य को घर लाने की परंपरा निभाई.
आधिकारिक रूप से उत्सव की शुरुआत प्राणप्रतिष्ठा के साथ हुई. परिवारों और मोहल्लों के मंडलों ने विधिवत तरीके से पूजा-अर्चना, आरती और मंत्रोच्चार कर भगवान गणेश की प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा की. लालबाग, परेल, गिरगांव, अंधेरी, चेंबूर और फोर्ट जैसे प्रमुख इलाके रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठे हैं. दादर, क्रॉफर्ड मार्केट और लोहार चॉल के बाजारों में भी उत्सव की रौनक देखते ही बन रही है. यहां खरीदारी के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. लोग पारंपरिक ‘मखर’ (देवताओं का आसन), फूल माला, मिठाइयों और अनुष्ठान से जुड़ी सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं. लालबाग गणेशोत्सव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. (पेज 6 पर)











