छोटे विक्रेताओं का पंजीकरण आसान
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए पंजीकरण आसान बनाने, रिफंड में तेजी लाने और नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपये की न्यूनतम सीमा तय करने जैसे सुधार एक नवंबर से लागू होने की संभावना है. एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. जीएसटी से संबंधित मामलों के सर्वोच्च निकाय जीएसटी परिषद की आठ अक्टूबर को हुई 57वीं बैठक में पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड और विवाद निपटान से जुड़े कई सुधारों को मंजूरी दी गई थी. अधिकारी ने बताया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के जरिये लागू किए जा सकने वाले बदलाव एक नवंबर, 2026 से चरणबद्ध ढंग से लागू किए जाएंगे. वहीं, जीएसटी कानून में संशोधन की जरूरत वाले बदलाव एक अप्रैल, 2027 से लागू होंगे.
अधिकारी के मुताबिक, संबंधित अधिसूचनाओं और परिपत्रों को विधि विभाग की मंजूरी मिल चुकी है और इन्हें शुक्रवार को जारी किए जाने की संभावना है. प्रस्तावित बदलावों के तहत, कई राज्यों में सामान बेचने वाले छोटे ई-कॉमर्स विक्रेता संबंधित राज्य में ई-कॉमर्स मंच के गोदाम को अपना मुख्य कारोबारी स्थल घोषित कर सकेंगे. इसके लिए विक्रेता को कम-से-कम एक राज्य में वास्तविक उपस्थिति रखनी होगी. वहां भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण पूरा होने के बाद अन्य राज्यों में ई-कॉमर्स मंच की सहमति से पंजीकरण कराया जा सकेगा.
इस व्यवस्था से करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को फायदा होने की संभावना है. जीएसटी पंजीकरण के लिए जरूरी दस्तावेजों एवं सूचनाओं को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे. इससे जीएसटी पोर्टल पर आवेदन की प्रक्रिया आसान होने और दस्तावेजों की कमी के कारण आवेदन खारिज होने या अतिरिक्त जानकारी मांगने की घटनाएं कम होने की उम्मीद है. वहीं, कर रिफंड के मामले में इलेक्ट्रॉनिक नकदी खाते में अतिरिक्त राशि लौटाने की प्रक्रिया स्वचालित की जाएगी. शून्य-दर वाली आपूर्ति और उलट शुल्क संरचना से जुड़े रिफंड दावों में भी जोखिम के आकलन के आधार पर 90 प्रतिशत राशि अस्थायी रूप से मंजूर करने की व्यवस्था होगी. इसके अलावा, रिफंड आवेदन की प्राप्ति की सूचना या कमी संबंधी ज्ञापन जारी करने की समयसीमा 15 दिन से घटकर 10 दिन की जाएगी. कर विवादों और अनुपालन का बोझ कम करने के लिए पंजीकृत कारोबार को कारण बताओ नोटिस जारी करने की न्यूनतम सीमा 10,000 रुपये तय करने का भी प्रस्ताव है.












