लोकवाहिनी, संवाददाता:मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने घोषणा की थी कि सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की हिंदी भाषा परीक्षा 28 जून को आयोजित की जाएगी। इस घोषणा के चलते राजपत्रित अधिकारियों और कर्मचारियों को यह परीक्षा देनी थी। हालांकि, राज्य सरकार के इस फैसले के बाद शिवसेना ठाकरे समूह, एमएनएस और कुछ अन्य संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी थी। इसके चलते राज्य में मराठी बनाम हिंदी भाषा का विवाद फिर से भड़कने की आशंका थी। इस घटनाक्रम के बाद राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की हिंदी भाषा परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया है।
मंत्री उदय सामंत ने आज मीडिया से बातचीत करते हुए इस संबंध में जानकारी दी। महाराष्ट्र में मराठी भाषा होने के बावजूद हिंदी भाषा अनिवार्य क्यों है? इसके पीछे क्या कारण है? कई सवाल उठ रहे थे। इसके बाद सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया है।
मंत्री उदय सामंत ने कहा, मुझे मीडिया से पता चला कि मराठी भाषा निदेशालय द्वारा ऐसी परीक्षा आयोजित की जाने वाली है। इसके बाद मैंने इस बारे में हमारे प्रधान सचिव किरण कुलकर्णी से चर्चा की। हिंदी भाषा की परीक्षा आयोजित करने की घोषणा की गई थी। हालांकि, अब उस परीक्षा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। मंत्री उदय सामंत ने आगे कहा, क्या भविष्य में हिंदी भाषा की परीक्षा आवश्यक होगी? राज्य के मराठी भाषा मंत्री के रूप में मैं स्वयं इसकी पुष्टि करूंगा। उसके बाद, यदि यह परीक्षा आवश्यक हुई तो हम यह परीक्षा लेंगे, अन्यथा, यदि यह परीक्षा आवश्यक नहीं हुई तो हम यह परीक्षा न लेने का निर्णय लेंगे, मंत्री उदय सामंत ने स्पष्ट किया।
एमएनएस ने दी थी चेतावनी
सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा परीक्षा अनिवार्य करने के सरकार के फैसले पर बोलते हुए, एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने कहा, “राज्य सरकार को अधिकारियों को इस तरह हिंदी सिखाने की कोई आवश्यकता नहीं है। महाराष्ट्र में काम करने वाले या महाराष्ट्र के मूल निवासी अधिकारियों से हिंदी सीखने की अपेक्षा नहीं की जाती है, लेकिन जो लोग महाराष्ट्र में काम करने आते हैं, उन्हें मराठी सीखना आवश्यक है। इसलिए, हम इस तरह की परीक्षा थोपकर हिंदी भाषा को अनिवार्य बनाने के सरकार के प्रयास की कड़ी निंदा करते हैं। राज्य सरकार से हमारी मांग है कि इस परीक्षा को तत्काल रद्द किया जाए। अन्यथा, परीक्षा केंद्र के बाहर होने वाले किसी भी तरह के हंगामे के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार होगी।” संदीप देशपांडे ने चेतावनी दी थी।
वहीं शिवसेना ठाकरे पार्टी के नेता और सांसद संजय राउत ने भी इस परीक्षा का विरोध किया। इसी तरह किशोरी पेडनेकर ने भी इस संबंध में कहा, क्या सरकार राज्य के लोगों को खुशहाल जीवन देने जा रही है? जब राज्य में मराठी भाषा बोली जाती है, तो क्या हिंदी भाषा की परीक्षा लेने की कोई आवश्यकता है? हिंदी का कोई विरोध नहीं है। लेकिन इस तरह से हिंदी थोपने का क्या कारण है? उन्होंने यह सवाल पूछा।









