आफत: आईएमडी के ताजा आंकड़ों ने बढ़ाई टेंशन
लोकवाहिनी, संवाददाता
नई दिल्ली। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। जून का महीना आधा बीत चुका है, लेकिन भारत की कृषि और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माने जाने वाले दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। अंतरिक्ष से ली गई ताजा सैटेलाइट तस्वीरों और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के हालिया आंकड़ों से एक बेहद डराने वाली तस्वीर सामने आई है। देश के एक बड़े हिस्से में मानसून अचानक बहुत कमजोर पड़ गया है और 15 जून की सैटेलाइट तस्वीरों में देश के बड़े हिस्से से मानसूनी बादल गायब दिखाई दिए।
महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 17 जून तक चलेगी लू
महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 17 जून तक लू चल सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, मराठवाड़ा में 17 जून तक और विदर्भ में 16 जून तक हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। वहीं, महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र और गोवा में 17 जून तक गर्मी के साथ उमस भरा मौसम रहने का अनुमान है। कोंकण और गोवा के कुछ इलाकों में 16 जून तक रात में भी गर्मी से बनी रहेगी।
मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने से 16 राज्यों में बारिश का इंतजार बढ़ गया है। इनमें राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं। मानसून दक्षिण भारत से आगे बढ़ने के बाद महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के आसपास ठहर गया है। पूर्वोत्तर राज्यों को कवर करने के बाद यह बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में रुक गया है। हालात इतने ज्यादा गंभीर हो चुके हैं कि जून के शुरुआती दो हफ्तों में ही देश भर में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बहुत नीचे गिर गया है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 4 जून से 15 जून के बीच देश भर में सामान्य तौर पर 53.7 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस दौरान केवल 19.2 मिलीमीटर बारिश ही दर्ज की गई है।
इसका सीधा मतलब है कि देश इस समय 64 प्रतिशत बारिश के भारी घाटे का सामना कर रहा है। इस स्थिति ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं और खरीफ फसलों की बुआई के साथ-साथ पानी की उपलब्धता पर भी एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। आमतौर पर जून के इस समय में भारत का जो नक्शा सैटेलाइट तस्वीरों में बादलों की घनी सफेद चादर से ढका रहता था, वह इस बार बिल्कुल साफ और सूखा दिखाई दे रहा है। 15 जून को भारत के इनसैट-3डीएस सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में प्रायद्वीपीय और मध्य भारत में बादलों का नामोनिशान नहीं है।










