नागपुर। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय की छवि को झटका देने वाली एक और बड़ी घटना सामने आई है। आरटीओ विभाग में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले नागपुर ग्रामीण आरटीओ के मोटर वाहन निरीक्षक साजन शालिग्राम शेंडे स्वयं रिश्वतखोरी के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो के जाल में फंस गए हैं। उनके निर्देश पर रिश्वत लेने वाले एक निजी एजेंट को भी गिरफ्तार किया गया है। जानकारी के अनुसार, 30 मार्च 2026 को 20 मोटर वाहन निरीक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने आरटीओ विभाग में कथित भ्रष्टाचार की शिकायत एसीबी से की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में साजन शेंडे भी शामिल थे। लेकिन बाद में हुई जांच में सामने आया कि शेंडे खुद खुर्सापार स्थित महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश सीमा जांच नाके पर अवैध वसूली के मामले में संलिप्त थे। 10 जून को एक ट्रक मालिक ने एसीबी में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जांच नाके से वाहन को गुजरने देने के लिए पहले भी 500 रुपये की रिश्वत ली गई थी।
शिकायत के आधार पर एसीबी ने सत्यापन किया। जांच के दौरान निजी एजेंट प्रवीण बाबूराव गायधाने ने ट्रक को नाके से आगे बढ़ाने के लिए 500 रुपये की मांग की। 11 जून को एसीबी ने जाल बिछाकर कार्रवाई की। जैसे ही प्रवीण गायधाने ने शिकायतकर्ता से 500 रुपये की रिश्वत स्वीकार की, उसे रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने बताया कि यह रकम एमवीआई साजन शेंडे के संरक्षण और निर्देश पर ली जा रही थी। इसके बाद एसीबी ने साजन शेंडे को भी हिरासत में ले लिया। अपर पुलिस अधीक्षक माधुरी बाविसकर और विजय माहुलकर के मार्गदर्शन में पुलिस निरीक्षक मयूर चौरसिया की टीम ने यह कार्रवाई की। मामले में नागपुर ग्रामीण के केलवद पुलिस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम धारा 7ए और 12 के तहत मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
आरटीओ विभाग में चर्चा तेज
गौरतलब है कि साजन शेंडे सहित 20 अधिकारियों ने कुछ समय पहले एसीबी और पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले से विभागीय भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। अब स्वयं उनके गिरफ्त में आने के बाद आरटीओ विभाग में इस बात की चर्चा है कि वे शिकायतों और आरोपों के माध्यम से अन्य अधिकारियों पर दबाव बनाने और उन्हें डराने का प्रयास कर रहे थे।













