आयुर्वेदिक सिद्धांतों का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण स्वास्थ्य क्षेत्र में बना सशक्त
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान नागपुर में ‘प्रकृति एवं स्वास्थ्य आकलन’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में संस्थान प्रभारी एवं सहायक निदेशक डॉ. सविता शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में सहयोगात्मक अनुसंधान, मानकीकरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मजबूत बनाने के लिए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक सिद्धांतों का वैज्ञानिक प्रमाणीकरण स्वास्थ्य क्षेत्र में इसकी स्वीकार्यता को और अधिक सशक्त बना रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धन्वन्तरी के पूजन तथा केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद के कुलगीत के साथ हुआ। नागपुर और वर्धा के विभिन्न आयुर्वेद महाविद्यालयों एवं प्रतिष्ठित संस्थानों से आए प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। तकनीकी सत्रों में मुख्य अन्वेषक डॉ. मनीषा वाधुलकर (तलेकर) तथा सह-अन्वेषक डॉ. विलास गांगुर्डे ने सीसीआरएस-आयुष प्रकृति परीक्षण एवं स्वास्थ्य आकलन परियोजना पर विस्तृत जानकारी दी। प्रतिभागियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान किया गया, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से आधुनिक मूल्यांकन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर भी मिला। प्रशिक्षण के बाद आयोजित संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और विशेषज्ञों से विभिन्न विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम के सफल आयोजन ने आयुर्वेदिक अनुसंधान, प्रकृति मूल्यांकन और स्वास्थ्य जागरूकता को नई दिशा प्रदान की। अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए तथा धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।










