फर्जी लोन, अश्लील फोटो से ब्लैकमेलिंग, भोपाल से ऐप डेवलपर गिरफ्तार
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। साइबर पुलिस की जांच में यह पता चला कि मस्त मनी ऐप को देशभर में करीब 5.32 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था। इनमें से लगभग 2.98 लाख लोगों ने संदेह होने पर ऐप हटा दिया, जबकि करीब 2.34 लाख मोबाइल फोन में यह अभी भी सक्रिय मिला। पुलिस का अनुमान है कि यदि प्रत्येक सक्रिय उपयोगकर्ता से औसतन 10 हजार रुपये की ठगी की गई होगी तो गिरोह करीब 234 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी कर चुका हो सकता है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि पूरे गिरोह को चार अलग-अलग टीमों में बांटा गया था। पहली टीम ऐप विकसित करती थी, दूसरी टीम डेटा एकत्र करती थी, तीसरी टीम कॉल सेंटर के माध्यम से पीड़ितों को धमकाकर वसूली करती थी, जबकि चौथी टीम ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग माध्यमों से ठिकाने लगाने का काम करती थी। बुधवार को पत्रकार परिषद में इस बारे में जानकारी देते हुए पुलिस उपायुक्त (साइबर क्राइम) दीपक अग्रवाल ने गिरोह का पर्दाफाश किया।
साइबर पुलिस ने इंस्टेंट लोन ऐप के जरिए साइबर ठगी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के बैरसिया निवासी कामिल सिद्दीकी (31) को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने मस्त मनी नामक इंस्टेंट लोन ऐप विकसित कर हजारों लोगों का निजी डेटा चोरी किया और उसी का इस्तेमाल कर उन्हें अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी देकर लाखों रुपये की उगाही की। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक वनप्लस नॉर्ड-2 मोबाइल और डेल लैटीट्यूड-5420 लैपटॉप जब्त किया है। प्रारंभिक जांच में इन उपकरणों में रिमोट एक्सेस और ऑनलाइन गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले सॉफ्टवेयर मिलने की जानकारी सामने आई है।
नागपुर की एक युवती ने 9 जून को शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने मस्त मनी ऐप के माध्यम से 20 हजार रुपये का लोन लिया था और 26 हजार रुपये लौटाने के बावजूद उससे अतिरिक्त रकम की मांग की जाने लगी। विरोध करने पर उसकी तस्वीरों को मॉर्फ कर अश्लील फोटो तैयार किए गए और उन्हें रिश्तेदारों व सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल किया गया। जांच में सामने आया कि यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध था और खुद को आरबीआई से मान्यता प्राप्त लोन प्लेटफॉर्म बताकर लोगों का भरोसा जीतता था। इंस्टेंट लोन का लालच देकर यूजर्स से एपीके फाइल और टर्म्स एंड कंडीशन स्वीकार कराई जाती थी। इसके बाद मोबाइल में मौजूद फोटो, संपर्क सूची, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य निजी दस्तावेजों तक पहुंच हासिल कर ली जाती थी। शुरुआत में छोटे-छोटे लोन देकर लोगों का विश्वास जीता जाता था और बाद में उसी डेटा का इस्तेमाल साइबर ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, लोन की राशि और ब्याज वसूलने के बाद भी गिरोह पीड़ितों का पीछा नहीं छोड़ता था। उनके मोबाइल से प्राप्त तस्वीरों को डिजिटल तकनीक से अश्लील रूप देकर रिश्तेदारों और दोस्तों को भेजने की धमकी दी जाती थी। लगातार फोन कॉल और ऑनलाइन संदेशों के जरिए मानसिक दबाव बनाकर अतिरिक्त रकम वसूली जाती थी। तकनीकी जांच के दौरान साइबर पुलिस ने ऐप के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, संचार माध्यमों और बैंकिंग लेन-देन का विश्लेषण किया। डिजिटल ट्रेल के आधार पर पुलिस की टीम भोपाल पहुंची और आरोपी कामिल सिद्दीकी को गिरफ्तार कर नागपुर लाई। पूछताछ में पता चला कि आरोपी उच्च शिक्षित है। उसने बीसीए, एमसीए और एमबीए की पढ़ाई की है तथा टेलीग्राम के माध्यम से अन्य आरोपियों के संपर्क में आया था। पुलिस ने कार्रवाई के बाद इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हटवा दिया है। अब गिरोह के अन्य सदस्यों, कथित मास्टरमाइंड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े लोगों की तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि ठगी से हासिल धन का इस्तेमाल कहीं किसी अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि में तो नहीं किया गया। इस पूरे मामले की जांच नागपुर साइबर पुलिस की विशेष टीम कर रही है।










