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साढ़े चार सौ किलोमीटर की यात्रा में युवतियों ने लिया भाग लोकवाहिनी, संवाददाता बुलढाणा। वैष्णव धर्म में वारी का बहुत महत्व है। संत तुकोबाराया के शब्दों में, ‘हेचि व्हावी माझी आस, पंढरीचा वारकरी, वारी चुको ना दे हरी’ वारकरियों का यही भाव है। यद्यपि कंप्यूटर युग में पारंपरिक वारी का स्वरूप बदल गया है, फिर... Read More






