प्रस्तावित देवस्थान इनाम कानून का विरोध तेज
मंदिरों के अधिकारों की रक्षा की उठी मांग
अमरावती में मंदिरों के हितों और देवस्थान संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर बड़ी संख्या में मंदिर ट्रस्टों के पदाधिकारी, विश्वस्त और श्रद्धालु एकजुट होकर जिला प्रशासन के समक्ष पहुंचे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी और संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर मंदिरों से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की।
ज्ञापन में मांग की गई कि मंदिरों को दान या खरीद के माध्यम से प्राप्त कृषि भूमि का मूल्यांकन व्यावसायिक संस्थाओं की तरह नहीं, बल्कि कृषि भूमि की दरों के अनुसार किया जाए। साथ ही मंदिरों की भूमि से जुड़े दस्तावेजों पर स्टांप शुल्क और पंजीयन शुल्क पूरी तरह माफ किया जाए। मंदिरों की कृषि भूमि को प्राकृतिक आपदा, ओलावृष्टि, सूखा या अन्य कारणों से नुकसान होने पर सामान्य किसानों की तरह सरकारी सहायता और मुआवजा देने की भी मांग की गई।
प्रतिनिधियों ने मंदिर और तीर्थक्षेत्र विकास निधि से संबंधित निर्णय लेने से पहले संबंधित मंदिर संस्थाओं और स्थानीय प्रबंधन समितियों को विश्वास में लेने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके अलावा प्रस्तावित “महाराष्ट्र देवस्थान इनाम उन्मूलन प्रारूप अधिनियम 2026” पर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई।
विश्वस्तों का कहना है कि देवस्थान इनाम भूमि मंदिरों की धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख आधार है। ऐसे में इस कानून के लागू होने से मंदिरों की परंपरागत संपत्तियों और अधिकारों पर खतरा उत्पन्न हो सकता है। प्रतिनिधियों ने सरकार से इस मसौदे को तत्काल वापस लेने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं से व्यापक चर्चा किए बिना कोई निर्णय लिया गया तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।










