नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया संकट और उसका भारत पर असर को लेकर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे, जिसमें तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। शाम 6:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत होगी। इस बातचीत में चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे। बातचीत के दौरान मिडिल ईस्ट के हालात पर चर्चा होगी। आचार संहिता की वजह से चुनावी राज्यों के सीएम, पीएम मोदी के इस संवाद कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
यह बैठक ऐसे समय में की जा रही है, जब देश एलपीजी की कमी का सामना कर रहा है। बैठक में तैयारियों पर फोकस किया जाएगा, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रधानमंत्री बैठक में ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत सामूहिक प्रतिक्रिया के महत्व पर प्रकाश डाल सकते हैं, ताकि केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल बना रहे।
मिडिल ईस्ट के संकट को देखते हुए पीएम मोदी लगातार सक्रिय हैं और पश्चिम एशिया के नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। इस मुद्दे पर उन्होंने संसद के दोनों सदनों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात इस समय बेहद चिंताजनक हैं और इस संकट को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो गया है। उन्होंने कहा कि इस संकट से सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया जूझ रही है। इसका विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर असर हो रहा है।
पीएम मोदी ने बताया कि भारत के लिए यह मुद्दा आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय, तीनों स्तरों पर अप्रत्याशित चुनौतियाँ लेकर आया है। कच्चे तेल और गैस की जरूरतों के साथ-साथ, खाड़ी के देशों में लगभग 1 करोड़ भारतीय रहते और कार्य करते हैं। उनकी सुरक्षा भारत सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएम ने बताया कि हॉर्मुज जैसे महत्वपूर्ण भागों से आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो गई है। इससे भारत का विदेशी व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है। भारत की कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई बाधित हो सकती है।
हालाँकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुरक्षित है। फर्टिलाइजर की सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है, मगर भारत के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने कहा कि भारत की संसद से शांति की एक एकजुट और एकमत आवाज पूरी दुनिया तक जानी चाहिए। पीएम ने शांति और संवाद को ही एकमात्र रास्ता बताया। संकट के समाधान के लिए पीएम मोदी इजरायल, ईरान, अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं।
मिडिल ईस्ट के हालात पर सरकार ने गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। इस दौरान सरकार ने विपक्ष को बताया कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कोई कमी नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से चार भारतीय जहाज सुरक्षित निकले हैं। पैनिक की कोई जरूरत नहीं है। विपक्षी दल कभी भी किसी भी तरह की जानकारी के लिए आ सकते हैं।












