नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की शुरुआत करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि आज दुनिया गहरे भू-राजनीतिक और आर्थिक बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे अस्थिर समय में, उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों की उम्मीदें ब्रिक्स से काफी बढ़ गई हैं। उन्होंने ब्रिक्स देशों से भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक व्यवधानों के परिणामों से बेहतर ढंग से निपटने के लिए व्यावहारिक तरीके खोजने का आग्रह किया।
साथ ही वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर दिया। जयशंकर ने साफ किया कि दुनिया की समस्याओं का समाधान केवल सैन्य शक्ति या प्रतिबंधों से संभव नहीं है। विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया की गंभीर स्थिति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर का विशेष रूप से जिक्र करते हुए कहा कि इन समुद्री रास्तों में आने वाली बाधाएं और ऊर्जा ढांचे पर मंडराते खतरे पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अनिवार्य है। यह बयान ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है।











