दैनिक लोकवाहिनी की खबर स्वतः संज्ञान लेकर दाखिल की जनहित याचिका!
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। नाग नदी के रास्ते गोसीखुर्द जलाशय में पहुंचने वाले गंदे पानी की समस्या को मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने गंभीरता से लिया है। यह पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दा होने के कारण न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दाखिल की है। अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट का आधार लेकर न्यायालय ने यह कार्यवाही शुरू की। नागपुर शहर से रोजाना बड़ी मात्रा में गंदा पानी उत्पन्न हो रहा है और उनमें से अधिकांश पानी पर प्रक्रिया की जा रही है, यह जानकारी न्यायालय के समक्ष आई है। हालांकि, उपचारित पानी का एक भाग नाग नदी में छोड़ा जा रहा है, जिसकी वजह से वह आगे जाकर गोसीखुर्द जलाशय में मिल रहा है। इसके मद्देनजर, जलाशय की गुणवत्ता पर हो रहे प्रभाव को लेकर न्यायालय ने चिंता व्यक्त की है। इस विषय की गहन जांच करने के लिए नागपुर महानगर पालिका के आयुक्तों को आवश्यक दस्तावेज और जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 जून 2026 को होगी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल थिलोर और न्यायमूर्ति राज वाकोड़े के समक्ष हुई।
नाग नदी में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से लगभग 1926.99 करोड़ रुपये का विशेष प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत नया गंदा पानी प्रसंस्करण केंद्र, विस्तृत मल निष्कासन जाल और पंपिंग स्टेशन बनाने का काम शुरू है। लेकिन, नदी प्रदूषण को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर धन खर्च किया जा रहा है, फिर भी उपचारित पानी को फिर से नदी में छोड़ने के कारण इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। गंदा पानी प्रबंधन में हुई खामियों के कारण, उपचार न किये गए पानी का भी नदी में मिलना विभिन्न रिपोर्टों में दर्ज किया गया है। गोसीखुर्द जलाशय के पानी पर निर्भर नागरिकों के स्वास्थ्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ रहा है, इस बारे में कोई व्यापक सर्वेक्षण नहीं किया गया है। इससे पहले नियंत्रक और महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों में भी स्थानीय स्वराज्य संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे।
दैनिक लोकवाहिनी की खबर का असर !
दैनिक लोकवाहिनी ने 23 अप्रैल 2026 के अंक में ‘गोसीखुर्द को जहरीला जलाशय बनने से बचाएं’ शीर्षक के साथ एक खबर प्रकाशित की थी। इस खबर में नागपुर शहर का गंदा पानी नाग नदी के माध्यम से गोसीखुर्द जलाशय में कैसे जा रहा है? इसका सच बताया गया था। संभव है कि सर्वोच्च न्यायालय ने इस दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर की गंभीरता को देखते हुए स्वयं याचिका दाखिल करवाने का निर्णय लिया हो, ऐसी संभावना जताई जा रही है।










