डरने की कोई बात नहीं – डॉ. प्रवीण महाजन
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। महाराष्ट्र में मानसून के आगमन का इंतजार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, जबकि किसान, कामगार, महिलाएं, छात्र और आम नागरिक आकाश की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। आज आएगा, कल आएगा, जैसी उम्मीदों के साथ बारिश का इंतजार करते लोगों की उत्सुकता भी बढ़ रही है, वहीं मानसून के आगे बढ़ने में देरी की खबरें भी सुनने में आ रही हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य के कई हिस्सों में चिंता का माहौल बन गया है। हालांकि, वर्तमान जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति को देखते हुए नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, यह बात जल विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण महाजन ने कही है।
बारिश का इंतजार सिर्फ मनुष्यों का ही नहीं बल्कि पशु-पक्षियों को भी परेशान कर रहा है। बढ़ती गर्मी के कारण जल की मांग भी बढ़ रही है और ग्रामीण इलाकों में पीने का पानी लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में राज्य के जलाशयों में उपलब्ध जल भंडारण एक राहत की बात है। राज्य में जून के दूसरे सप्ताह तक जलाशयों में 25 प्रतिशत से अधिक उपयोगी जल भंडारण उपलब्ध है। पिछले वर्ष की तुलना में यह भंडारण पांच प्रतिशत कम है, फिर भी स्थिति चिंताजनक नहीं बताई जाती, यह जल संसाधन विभाग के आंकड़ों से स्पष्ट होता है। वर्तमान में राज्य के जलाशयों में कुल 10,347.91 मिलियन घन मीटर उपयोगी जल भंडारण उपलब्ध है। इसके अलावा, 7,742.07 मिलियन घन मीटर मृत जल भंडारण भी उपलब्ध है। इसके साथ ही 936.42 मिलियन घन मीटर मृत जल भी उपलब्ध है, जिससे आने वाले कुछ हफ्तों के लिए स्थिति नियंत्रित मानी जा रही है। पिछले साल की तुलना में इन जलाशयों में लगभग चार प्रतिशत अधिक पानी का भंडारण उपलब्ध है।
अमरावती जिले में भी संतोषजनक भंडारण – अमरावती विभाग के 276 जलाशयों में 1,503.66 मिलियन घन मीटर उपयोगी जल है और 787.46 मिलियन घन मीटर मृत जल भंडारण मौजूद है। इसलिए वर्धा क्षेत्र के अधिकतर भागों में तुरंत पानी की कमी की संभावना कम ही दिख रही है।
संभाजीनगर जिले में 28 प्रतिशत से अधिक भंडारण – छत्रपती संभाजीनगर जिले के 929 जलाशयों में वर्तमान में 2,037.82 मिलियन घन मीटर उपयोगी जल भंडारण है और 1,829.34 मिलियन घन मीटर मृत जल भंडारण है।
पुणे जिले में सबसे कम भंडारण – ‘पुणे तिथे काय उणे’ यानी पुणे जिले में इस साल तुलनात्मक रूप से कम जल भंडारण दर्ज किया गया है। पुणे जिले में 724 जलाशयों में वर्तमान में 2,334.48 मिलियन घन मीटर उपयोगी जल भंडारण है और 3,140.08 मिलियन घन मीटर मृत जल उपलब्ध है। पिछले वर्ष की तुलना में यह भंडारण कम है।
नागपुर जिले की स्थिति स्थिर – विदर्भ के नागपुर विभाग में 387 जलाशयों में 1,743.52 मिलियन घन मीटर उपयोगी जल भंडारण है।
पानी का सावधानीपूर्वक इस्तेमाल करें
विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय की स्थिति गंभीर नहीं है, लेकिन नागरिकों को पानी का जिम्मेदारी से उपयोग करना चाहिए। मानसून देर से आ रहा है, लेकिन वर्षा ऋतु में जलाशय फिर से भर जाएंगे, ऐसी आशा व्यक्त की जाती है। इसलिए, पानी की कमी का डर नहीं होना चाहिए। मृत जल भंडारण विशेष रूप से सूखे और आपातकालीन स्थिति के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यह भंडारण कठिन समय में मानव जीवन का आधार बनता है। इसलिए, राज्य में उपलब्ध जल भंडारण को देखते हुए अभी घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन पानी की बर्बादी रोकना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। महाराष्ट्र के मानसून का इंतजार करने वाले राज्य के जलाशयों में उपलब्ध पानी राहत का स्रोत है, फिर भी ‘पानी है, तो बर्बाद मत करो’ और ‘बारिश देर से हो रही है, इसलिए घबराओ मत’ जैसी दोनों अतिवादी भूमिकाओं से बचना जरूरी है, क्योंकि पानी हमारी सबसे बड़ी प्राकृतिक पूंजी है और उसे संजोना समय की आवश्यकता है, ऐसा डॉ. महाजन ने कहा।












