न्यायाधिकरण पर दबाव बनाने की कोशिश? मैट ने राज्य सरकार के आवेदन पर जताई नाराजगी
लोकवाहिनी, संवाददाता
नागपुर। महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (मैट) ने एक मामले में राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग के रुख पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। इसलिए विभाग को संबंधित याचिका वापस लेना पड़ा। अध्यक्ष न्यायाधीश मंगेश पाटिल (अध्यक्ष) और सदस्य ए.एम. कुलकर्णी के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मूल आवेदन में विभिन्न संवर्गों के कर्मचारियों की आपसी वरिष्ठता के विवाद पर सुनवाई पूरी होने के बाद 6 जनवरी 2026 को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। लेकिन, राज्य सरकार ने अंतरिम आदेश में संशोधन के लिए फिर से याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने सरकार से जानकारी मांगी कि किसके निर्देश पर अर्जी दाखिल की गई। उस समय सरकारी पक्ष ने कार्यालय अभिलेख प्रस्तुत किये। न्यायाधिकरण ने अभी तक अपना फैसला नहीं सुनाया है। इसलिए पदोन्नति प्रक्रिया में देरी होने की वजह बताकर याचिका दायर की गई थी। हालांकि, न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि देरी अनुचित नहीं थी। पक्षकारों की व्यक्तिगत चिंता समझी जा सकती है, लेकिन राज्य के विभाग की इतनी जल्दबाजी दिखाने का कोई कारण नजर नहीं आता। न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि विवाद केवल विभिन्न फीडर कैडरों में वरिष्ठता से संबंधित था। सरकार के रुख की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए पीठ ने कहा कि इस तरह का आवेदन प्रथम दृष्ट्या न्यायाधिकरण पर दबाव डालने या उसके कामकाज में हस्तक्षेप करने का प्रयास प्रतीत होता है। न्यायाधिकरण ने आदेश में कहा, इस तरह के आचरण से अदालत की अवमानना या न्याय में बाधा का मुद्दा भी उठ सकता है।
इस बीच, न्यायमूर्ति मंगेश पाटिल ने मामले की आगे की सुनवाई से खुद को अलग करने का फैसला किया, ताकि इन घटनाक्रमों के कारण मामले की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे। इसलिए मूल आवेदन पर नए सिरे से सुनवाई के लिए नई खंडपीठ गठित करने का निर्देश दिया गया। सरकारी पक्ष द्वारा अंततः संबंधित आवेदन वापस लेने का अनुरोध करने के बाद न्यायाधिकरण ने याचिका खारिज कर दी।













