लोकवाहिनी, संवाददाता
परभणी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस परसों मुझे विमान में मिले थे। उस समय मुख्यमंत्री असहाय दिखाई दे रहे थे। इतना असहाय मुख्यमंत्री मैंने उस दिन देखा। उन्हें समझ में आ रहा था कि उनके अपने ही बॉस उनके पंख काट रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का भी क्या हुआ? वे भी भाजपा के अध्यक्ष थे। लेकिन बाद में क्या हुआ, उन पर इथेनॉल का पानी डाल दिया गया और उनके पंख काट दिए गए। अब नितिन गडकरी कहाँ हैं? ऐसे शब्दों में पूर्व मुख्यमंत्री और ठाकरे गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर निशाना साधा। उद्धव ठाकरे रविवार से परभणी के दौरे पर थे। बागी सांसद संजय जाधव के निर्वाचन क्षेत्र में उन्होंने शिवसैनिकों के साथ संवाद किया। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने संजय जाधव के साथ-साथ भाजपा पर भी जोरदार हमला बोला। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी उद्धव ठाकरे के बयान पर पलटवार किया है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि ऑपरेशन टाइगर के माध्यम से मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पंख काटने का काम शुरू है। साथ ही उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री मुझे विमान में मिले थे, तब वे असहाय दिखाई दे रहे थे। इस पर भी देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, मेरे तो कोई पंख ही नहीं हैं, फिर मेरे पंख कौन काटेगा? मेरे साथ महाराष्ट्र के 14 करोड़ लोगों का आशीर्वाद है, ऐसा भी देवेंद्र फडणवीस ने कहा।
संजय जाधव पर उद्धव ठाकरे ने साधा निशाना
शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे परभणी के दौरे पर हैं। उन्होंने पदाधिकारियों के साथ संवाद किया। परभणी के बागी सांसद संजय जाधव उर्फ बंडू जाधव पर उन्होंने जमकर निशाना साधा। इस दौरान उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोग कहते हैं उद्धव ठाकरे घूमे नहीं। तब कौन घूम रहा था? उस दौर में राहुल मेरे साथ थे। यह गद्दार कहाँ था? मैं किसानों के खेतों की मेड़ों पर था। हमने किसानों से मुलाकात की, उनसे बातचीत की। हमने कर्जमाफी की मांग उठाई थी। किसी भी दौर में यह गद्दार नहीं था। वह कहता है कि उद्धव ठाकरे को हमारी ओर ध्यान देना चाहिए था। बिल्कुल सही है। अगर ध्यान दिया होता तो तुम्हारी करतूतों का पता चल जाता। ध्यान देना चाहिए था। अब आप लोग ध्यान दीजिए। महात्मा फुले ने किसानों की जिम्मेदारी दी थी। आपने वही जिम्मेदारी मुझे दी है। अब इस जिम्मेदारी को आपको ही निभाना है। इस वर्ष संघ के 100 वर्ष पूरे हुए हैं। भाजपा आपातकाल के बाद बनी पार्टी है। हमारे तीन सांसद हैं और राज्यसभा में एक सदस्य हैं। इतने काफी हैं। तीन सांसद रह जाने का मतलब यह नहीं कि शिवसेना खत्म हो गई। सांसद संजय जाधव का नाम लिए बिना उद्धव ठाकरे ने उन पर तीखा हमला किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि जब मैं किसानों से मिल रहा था, तब वे कहीं भी दिखाई नहीं दिए। आगे उद्धव ठाकरे ने कहा कि जनप्रतिनिधि ही पार्टी नहीं होते।
■ मुझे पंख ही नहीं हैं, फिर काटेगा कौन : सीएम फडणवीस
ठाकरे ने दावा किया था कि फडणवीस को पता चल रहा है कि उनके पंख काटे जा रहे हैं। उद्धव ठाकरे के दावे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रतिक्रिया दी। मुझे पंख ही नहीं है, फिर काटेगा कौन? ऐसा सवाल मुख्यमंत्री ने उद्धव ठाकरे से किया। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को वातवण बंदरगाह के काम का जायजा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ठाकरे के साथ हुई एक साथ विमान यात्रा पर भी बात की। ठाकरे के असहाय होने के दावे पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, वह एक कोने में बैठे थे, तो मैं दूसरे कोने में बैठा था। विमान में बैठने के बाद आदत के अनुसार मैं डाउनलोड की हुई फिल्म, ओटीटी पर सीरीज देख रहा था। विमान शुरू होने से लेकर उतरने तक मैं सीरीज देख रहा था। इसलिए मेरी असहायता कहां दिखाई दी? मैं इंसान हूँ इसलिए मेरे पंख ही नहीं है, फिर मेरे पंख काटेगा। मेरे साथ 14 करोड़ लोगों का आशीर्वाद है। मेरे वरिष्ठों का आशीर्वाद है। इसलिए चिंता करने की जरूरत नहीं आ गई। उद्धव ठाकरे की शुभकामनाएं मैं स्वीकार करता हूँ। 2019 में अगर ऐसा होता तो तस्वीर अलग होती। उस समय वह दे नहीं सके। उनकी शुभकामनाएं आज स्वीकार करता हूँ, ऐसा फडणवीस ने कहा। साथ ही ठाकरे और मैं अगर बगल में बैठे होते तो बातचीत करते। विमान यात्रा में यह संयोग से एक साथ आ गए, ऐसा भी मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा। देश में ‘ऑपरेशन देवेंद्र’ शुरू होने के ठाकरे के दावे पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, मेरे लिए राजनीतिक सवाल गौण है। राजनीतिक सवालों से किसी का भला नहीं होगा। मुझे लोगों का भला होगा, इसी बात का मैं विचार करूंगा। हम आसपास बैठे होते तो बातचीत करते। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की प्रतिक्रिया पर उद्धव ठाकरे क्या प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
जनता और मतदाता ही पार्टी होते हैं। अगर दो-तिहाई सदस्य इधर-उधर चले जाएं और किसी दूसरी पार्टी में विलय कर ले, तो क्या उसे कानूनी मान्यता मिल जाती है? उल्हास बापट कहते हैं, नहीं। उल्हास बापट वरिष्ठ विधि विशेषज्ञ हैं। दो-तिहाई प्रतिनिधि विलय का निर्णय नहीं लेते। अगर कानून का राज है तो उन्हें अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। मुझे आज भी लोकसभा अध्यक्ष पर विश्वास है। शुरुआत ऊपर से होनी चाहिए। लोकसभा अध्यक्ष को कानून का पालन करना चाहिए। संविधान के अनुसार जो उचित है, वही लोकसभा अध्यक्ष को करना चाहिए। अधिकार और मर्जी में फर्क होता है। हम अधिकार को मानते हैं, मर्जी को नहीं। उन्हें लगता होगा कि छठा सदस्य आ गया तो काम हो गया, लेकिन ऐसा नहीं होता। मेरी समझ है कि लोकसभा अध्यक्ष कानून का सम्मान करने वाले व्यक्ति हैं। जो इस पद पर बैठे हैं, उन्हें संविधान का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। इतिहास में आपकी पहचान संविधान तोड़ने वाले अध्यक्ष के रूप में न हो।











